रतिया। मानसून की दस्तक के साथ ही घग्गर नदी एक बार फिर रतिया क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बन गई है। हिमाचल प्रदेश से पंजाब होते हुए हरियाणा में प्रवेश करने वाली यह नदी हर वर्ष मानसून में खतरे का संकेत देती है। बीते वर्षों में आई बाढ़ के अनुभव के चलते तटवर्ती गांवों में दहशत का माहौल बन जाता है।
क्षेत्रवासियों के अनुसार अब तक घग्गर नदी के कारण लगभग 10 बार बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो चुकी है। वर्ष 2023 की बाढ़ ने सबसे अधिक तबाही मचाई थी। तब करीब 30 गांव प्रभावित हुए थे। इससे पहले 2010 में नदी का पानी शहर के नजदीक तक पहुंच गया था हालांकि उस समय जलस्तर घटने से बड़ा नुकसान टल गया।
1996, 1993 सहित कई वर्षों में भी घग्गर नदी ने ग्रामीण क्षेत्रों में तबाही मचाई थी। लांबा, कमाना, नथवान, कंवलगढ़, लाली, तेलीवाड़ा, घासवा, चिम्मो, रतनगढ़, मिराना, लालवास, बलियाला, बोड़ा, खैरपुर, खाई, अलीका, कलोठा, महमदकी, पिलछियां, मढ़ सहित कई गांव हर वर्ष बाढ़ के खतरे की आशंका में रहते हैं।
वर्ष 2023 में करीब 20 हजार क्यूसिक पानी आने से नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा और कई गांवों में पानी घुस गया। वर्ष 2025 में लगभग 12 हजार क्यूसिक पानी आने पर स्थिति नियंत्रण में रही, जिससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। ग्रामीणों का कहना है कि हर मानसून में नदी का बढ़ता जलस्तर चिंता बढ़ा देता है और प्रशासनिक स्तर पर स्थायी समाधान की आवश्यकता महसूस की जा रही है। बाढ़ नियंत्रण के ठोस इंतजाम नहीं होने से हर साल ग्रामीण भय के साये में जीने को मजबूर हैं।
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घग्गर नदी में अभी नही आया पानी
बुधवार रात्रि को बारिश के बाद वीरवार तक नदी में पानी नहीं आया था। हालांकि मानसून के वक्त नदी का स्तर काफी तेजी से बढ़ता है इसलिए घग्गर नदी के किनारे पर रहने वाले लोग लगातार नदी के तट पर नजर बनाए हुए हैं। सिंचाई विभाग के उपमंडल अधिकारी राजेंद्र कुंडू का कहना है कि घग्गर अभी पूरी तरह सुखी पड़ी है। विभाग ने बाढ़ से बचाव के लिए पूरी तैयारियां की हुई हैं।
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