फतेहाबाद। केंद्र सरकार ने तीसरे लिंग का दर्जा तो दे दिया, लेकिन मंगलामुखी समाज को सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। पेंशन बनवाने के लिए छह सालों से चक्कर काट रही हैं, लेकिन हर बार मां-बाप के नाम के सवाल का जवाब नहीं दे पाती हैं। इन मंगलामुखीों के दर्द का न कोई समझने वाला है और न ही कोई सुनने वाला।
वीरवार को लघु सचिवालय पहुंचीं मंगलामुखीों ने बताया कि पेंशन के लिए जब आते हैं, तो पेंशन शाखा में कार्यरत कर्मचारी माता-पिता का नाम पूछते हैं। यह सुनकर उनकी आंखों में आंसू छलक पड़ते हैं। उन्होंने कर्मचारियों को बताया कि हमने कभी अपने माता-पिता को नहीं देखा। जब हम दो वर्ष के थे, तभी मां-बाप ने घर से अलग कर दिया और मंगलामुखी समाज को सौंप दिया। हमारी गुरु ही माता-पिता है। परिवार पहचान पत्र, राशन कार्ड, वोटर कार्ड और मंगलामुखी पहचान कार्ड सभी कागजातों में पहचान गुरु माता के नाम से ही हैं। इस पर कर्मचारियों ने बताया कि हम कुछ नहीं कर सकते, जब तक कागजात पूरे नहीं हो जाते। संवाद
आधार कार्ड में भी माता-पिता का नाम नहीं
भट्टू कलां से आई मंजीत महंत ने बताया कि उनके आधार कार्ड में नाम हैं। मगर उसमें माता-पिता का नाम नहीं है। जन्म तिथि और ट्रांसजेंडर के अलावा पत्ता लिखा हुआ है। पेनकार्ड भी बना हुआ है, जिसमें पिता के नाम के आगे गुरु शशि महंत का नाम लिखा हुआ है। आधार कार्ड में माता-पिता का नाम दर्ज नहीं होने के कारण पेंशन भी नहीं बनाई जा रही है। बुढ़ापा व दिव्यांग पेंशन की तरह मंगलामुखीों को भी सरकार हर महीने 2750 रुपये की पेंशन दे रही है।
समाज की खुशियों को अपनी खुशी समझने वाले खुद मायूस
मंजीत महंत कहती हैं कि मंगलामुखी समाज के हर परिवार की खुशियों में शामिल होते हैं। नाचते-गाते हुए खुशियां मनाते हैं। जब नाचते-गाते हैं, तो अपना दर्द छिपाकर भी दूसरों को खुश रखते हैं। जब समाज में कोई परिवार जरूरतमंद होता है, तो उसकी मदद भी करती हैं। गरीब परिवार की बेटियों की शादियों में भी सहायता करते हैं। फिर भी जब मंगलामुखी समाज को सहायता की जरूरत होती है, तो कोई भी आगे नहीं आता है।
कोट
मंगलामुखी को आ रही इस समस्या के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। अब मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली है, तो समाधान के बारे में एक-दो दिन में बता पाऊंगी।
-सरोज देवी, जिला समाज कल्याण अधिकारी, फतेहाबाद