गांव भिरड़ाना में युवाओं को पढ़ाते हुए सीनियर बैंक मैनेजर सुनील रायका स्त्रोत स्वयं
फतेहाबाद। तुलसा देवी अनपढ़ थी। पति की मौत के बाद बेटे के साथ तीन बेटियों को संभालने की जिम्मेदारी भी थी लेकिन मां ने हिम्मत नहीं हारी। खुद को भरोसा दिया और बकरियां पाली, खेतों में मजदूरी की और उन्हें पढ़ाया। मां की मेहनत की बदौलत बैंक में नौकरी हासिल की, लेकिन नौकरी मिलने के थोड़े समय बाद ही मां का साथ छूट गया। ये कहते हुए सुनील दुख के साथ गर्व भी महसूस करते हैं।
सुनील ने कहा कि मां न होती तो शायद होटलों पर बर्तन साफ कर रहा होता। फतेहाबाद के पीएनबी बैंक में सीनियर मैनेजर के पद पर तैनात सुनील रायका का कहना है कि मां ने विपरीत परिस्थितियों में पढ़ाया। ऐसे ही हालात कई अन्य परिवारों के भी होते है और युवा पढ़ नहीं पाते हैं इसलिए वह पिछले करीब 16 साल से युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवा रहे हैं ताकि वह भी मुकाम हासिल कर सके। अब तक करीब 95 युवा सरकारी नौकरी लग चुके हैं। अब ये युवा भी साथ जुटकर अन्य युवाओं को पढ़ा रहे हैं। संवाद
मां ने हमेशा हौंसला दिया, कहा- बेटा बस पढ़कर नाम रोशन करना
सुनील बताते हैं कि पिता जीत सिंह की वर्ष 2000 में बीमारी के कारण मौत हो गई थी। उस समय उम्र 14 साल की थी। मां उन्हें लेकर भिरड़ाना आ गई। यहां पर मां ने उन्हें पढ़ाने के लिए घर पर बकरियां पाली और खेतों में मजदूरी का काम किया। मां ने तीन बहनों और उन्हें पढ़ाया। वर्ष 2009 में ओबीसी बैंक अब जो कि पीएनबी में मर्ज हो चुका में नौकरी लग गई। लेकिन जनवरी 2010 में मां की मौत हो गई। इसी के साथ ही उन्होंने बच्चों को पढ़ाने के लिए शुरुआत की। वर्ष 2014 में पीओ के पद पदोन्नत हुए और वर्ष 2017 में मैनेजर के पद पर पदोन्नत करके जालंधर भेज दिया गया। वर्ष 2020 में सीनियर मैनेजर के पद पर पदोन्नत करके भूना तैनात हुए और अब फतेहाबाद में तैनात हैं। यही नहीं जो बच्चे कक्षा लगाने नहीं आ सकते हैं उन्हें मिशन एजुकेशन के नाम से बनाए गए व्हाट्स एप ग्रुप के जरिये ऑनलाइन पढ़ाया जाता है।