फतेहाबाद। जिले में हीमोफीलिया के 55 मरीज पंजीकृत हैं। पिछले तीन सालों में इस बीमारी के कारण पांच मरीजों की मौत हो चुकी है जबकि पांच नए बच्चे भी रजिस्टर्ड हुए हैं। भूना के जोगिंद्र सेठी का बेटा भी इस बीमारी से ग्रस्त है। जब उनका बेटा उपचार के लिए भटक रहा था, तो जोगिंद्र ने इसे समझा और मरीजों की मदद करने के लिए सोसायटी बनाई।
विशेषज्ञों के अनुसार हीमोफीलिया एक रक्तस्राव विकार है जिसमें चोट लगने पर रक्त नहीं रुकता। समय पर इलाज न मिलने से यह जानलेवा भी हो सकता है। ऐसे में मरीज को समय पर इंजेक्शन लगवाना पड़ता है। अगर समय पर इंजेक्शन न लगवाया जाए तो मौत भी हो जाती है। इलाज में फेक्टर-8 और फेक्टर-9 के इंजेक्शनों की आवश्यकता होती है फिलहाल फेक्टर-8 के इंजेक्शनों की कमी सामने आ रही है।
इस सोसायटी का उद्देश्य मरीजों को समय पर उपचार प्राप्त कराने में मदद करना है ताकि उन्हें भटकना न पड़े। इसके साथ ही सोसायटी मरीजों को सही जानकारी और संसाधन मुहैया कराकर उनकी जीवन गुणवत्ता में सुधार करने की कोशिश कर रही है।
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मरीजों के लिए मददगार बने सेठी
जोगिंद्र सेठी बताते है कि उनका बेटा भी इसी बीमारी से ग्रस्त है। उसके उपचार के लिए उन्होंने लंबे समय तक संघर्ष किया और दिल्ली के बड़े अस्पतालों में उपचार करवाया। किसी और को संघर्ष न करना पड़े इसलिए सोसायटी बनाकर मरीजों तक मदद पहुंचा रहे हैं। सोसायटी इस बीमारी से ग्रस्त मरीजों को स्मार्ट कार्ड बनाकर देती है। इमरजेंसी में मरीज को अस्पताल पहुंचाते हैं। मरीज को इमरजेंसी में टीके की व्यवस्था करवाते हैं। जोगिंद्र बताते हैं कि पहले ये इंजेक्शन रोहतक पीजीआई में ही मिलते थे लेकिन अब जिले के सरकारी अस्पताल में भी उपलब्ध हैं।
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हीमोफीलिया बीमारी के ये हैं लक्षण
रक्तस्राव होना हीमोफीलिया का प्राथमिक लक्षण है। त्वचा के नीचे रक्तस्राव होना, मुंह में या मसूड़ों से खून बहना, टीकाकरण के बाद खून निकलना, जोड़ों में सूजन या दर्द होना, बार-बार नाक से खून बहना आदि हीमोफीलिया बीमारी के लक्षण हैं।
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बीमारी से ग्रस्त रखें ध्यान
चिकित्सकों के मुताबिक जोड़ों पर ज्यादा दबाव न पड़े इसलिए नियमित रूप से व्यायाम करें और उनकी देखभाल रखें। अपना पहचान पत्र साथ रखें जिसमें ब्लड ग्रुप लिखा होना चाहिए। यात्रा के दौरान विशेष सावधानियां बरतें। यदि किसी को हीमोफीलिया है तो उसे किसी भी तरह ब्लीडिंग होने पर तुरंत इलाज करना चाहिए। खून संबंधी या अन्य किसी प्रकार के संक्रमण से बचने के लिए विशेष सावधानी बरतें और समय-समय पर जांच जरूर कराते रहें।
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हीमोफीलिया बीमारी के इंजेक्शन अस्पताल में उपलब्ध रहते हैं। पिछले दिनों अपने स्तर पर खरीद भी की गई है। फेक्टर 8 के इंजेक्शनों की अगर कमी है तो उसकी डिमांड भेजी जाएगी।
-डॉ. बुधराम, सिविल सर्जन