किसान खासे चिंतित दिखाई दिए। अनाजमंडी में इस समय कई हजार क्विंटल धान की बोरियां व ढेरियां रखी गई हैं। उठान-लदान देरी से होने के कारण किसान ढेरी के पास ही रात को सोने को मजबूर हैं।
वीरवार सुबह बरसात से खुले आसमान के नीचे पड़ी उनकी खून-पसीने की कमाई भीगती नजर आई। हालांकि बरसात ज्यादा देर न होने से नुकसान कम हुआ लेकिन जो धान की ढेरियां या बोरियां भीगी, उसको खरीद एजेंसियों ने वीरवार को नहीं उठाया।
गांव अहसीलदार के किसान नसीब चंद व टहला राम ने बताया कि दो दिन से वे धान के उठान की इंतजार कर रहे हैं। अब रात को बरसात हो गई है। खरीद एजेंसी के अधिकारी ये कहकर उठान करने से इंकार कर रहे हैं कि धान में नमी है।