टोहाना। दिल्ली के केशवपुरम निवासी बर्तन व्यापारी विकास जैन की दो बेटियों में से बड़ी बेटी 14 वर्षीय विधि अब जैन साध्वी बन गई हैं। बुधवार को शहर के रेलवे रोड स्थित अनाज मंडी परिसर में उन्होंने जैन भगवती दीक्षा कार्यक्रम में दीक्षा ली। वह अब जैन साध्वी के रूप में आगामी जीवन व्यतीत करेंगी।
दीक्षा कार्यक्रम में राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब व दिल्ली से हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इस दौरान विधि अनुसार से सभी रस्में अदा करने के बाद विधि जैन को साध्वी डॉ. शिवप्रज्ञा द्वारा दीक्षा दी गई। दीक्षा का आयोजन गुरु फकीर सहज जैन चैरिटेबल ट्रस्ट, एसएस जैन सभा मॉडल टाउन द्वारा किया गया। इससे पूर्व शहर में शोभायात्रा निकाली गई।
कार्यक्रम में बेटी को दीक्षा लेते देखकर विकास जैन व उनका पूरा परिवार प्रफुल्लित नजर आया। इस कार्यक्रम में राज्यसभा सदस्य सुभाष बराला, नगर परिषद के चेयरमैन नरेश बंसल, वाइस चेयरपर्सन प्रतिनिधि बलदेव सैनी आदि मौजूद रहे।
नौ माह तक दृढ़ता से किया नियमों का पालन
इससे पूर्व विधि जैन ने जैन साध्वी डाॅ. शिवप्रज्ञा के सानिध्य में 9 महीने तक विभिन्न मंत्रों, दैनिक दिनचर्या को लेकर ज्ञान लेना शुरू कर दिया। जैन धर्म के कठोर नियमों का भी नौ महीने तक पालन किया है। जब परिवार के सदस्यों ने विधि के वैराग्य भाव और नियमों के पालन का संकल्प देखा तो उन्होंने उन्हें दीक्षा लेने के लिए सहमति दे दी। विधि जैन की माता शिल्पा गृहिणी हैं। विधि की एक छोटी बहन हर्षिता है, जो फिलहाल पढ़ाई कर रही है। बेटी के दीक्षा लेने के बाद विकास जैन व मां शिल्पा ने कहा कि उन्हें बेहद खुशी है कि बेटी ने जैन धर्म के लिए अपना जीवन समर्पित किया है। जैन साधु या साध्वी बनना बेहद कठिन कार्य है। उनकी बेटी ने पूरे वैराग्य भाव और नियमों का पालन करके दीक्षा प्राप्त की है। संतों के सानिध्य में रहकर बेटी खुशीपूर्वक जीवन व्यतीत करेगी।
दीक्षा लेने के बाद भी जारी रखेंगी पढ़ाई
परिजनों के अनुसार विधि जैन नौवीं की पढ़ाई कर रही है, अब वह दीक्षा के बाद भी अपनी पढ़ाई जारी रखेंगी। मात्र 14 वर्ष की उम्र में विधि जैन को दीक्षा लेते हुए कार्यक्रम में उपस्थित कई लोग भावुक भी हुए। विधि जैन अब दीक्षा लेने के बाद भौतिक दुनिया के त्याग के बाद जैन साध्वी बनकर रहेंगी। वे नंगे पैर चलेंगी। भिक्षा के तौर पर जो खाना मिलेगा, उसे ग्रहण करेंगी। एसी, मोबाइल फोन जैसे गैजेट का उपयोग भी नहीं करेंगी। साथ ही ब्रह्मचर्य का पालन करेंगी और जमीन पर सोएंगी।