पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष भारतभूषण मिड्डा ने ही भाजपा नेता वेद फुलां के नाम का प्रस्ताव किया जिसका अनुमोदन सरदारी लाल ने किया।
इस प्रक्रिया के दौरान जिला चुनाव प्रभारी श्रीनिवास गोयल एवं पार्टी प्रभारी रवि सैनी भी मौजूद रहे। वेद फुलां के नाम का ऐलान होते ही उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई।
समर्थकों ने ढोल ताशे और गुलाल उड़ाकर वेद फुलां के जिलाध्यक्ष बनने का स्वागत किया। फुलां को पार्टी प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला का करीबी माना जाता है।
एक एक पैसा विकास में लगे, यही प्राथमिकता
अरोड़वंश धर्मशाला में भाजपा के नवनियुक्त जिलाध्यक्ष वेद फुलां ने पंचायत चुनावों को अपनी पहली प्राथमिकता बताया।
उन्होंने साफ कहा कि वे पंचायत चुनावों में प्रत्येक गांव और जिला परिषद में भाजपा कार्यकर्ता को कुर्सी पर बैठे देखना चाहते हैं ताकि केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा भेजा गया एक एक पैसा गांव के विकास में लग सके।
फुलां ने कहा कि उनके ऊपर इस बात का दबाव तो है कि उनके पूर्ववर्ती जिलाध्यक्ष भारतभूषण मिड्डा ने केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं को बेहतरीन ढंग से जनता के बीच पहुंचाया है, लेकिन उनके साथ होने से ही शक्ति मिली है कि मैं भी ऐसा कर पाऊं।
जिले की टीम के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में वेद फुलां ने कहा कि प्रदेशाध्यक्ष के चुनाव के बाद ही फतेहाबाद जिले के संगठनात्मक टीम का एलान होगा।
प्रदेशाध्यक्ष के चुनाव के लिए जिले से भाग लेेंगे पांच प्रतिनिधि
इस दौरान मौजूद भाजपा चुनाव प्रभारी श्रीनिवास गोयल ने बताया कि प्रदेशाध्यक्ष के चुनाव के लिए फतेहाबाद से पांच प्रतिनिधियों का चुनाव किया गया है।
इनमें फतेहाबाद से प्रवीण जोड़ा, स्वतंत्र चौधरी, रतिया से बलदेव ग्रोहा, विनोद जग्गा, और टोहाना से सरदारी लाल शामिल हैं। ये सभी लोग भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के चुनाव में फतेहाबाद की ओर से हिस्सा लेंगे।
श्रीनिवास गोयल ने पूर्व जिलाध्यक्ष भारतभूषण मिड्डा को एडजस्ट करने के सवाल पर इतना ही कहा कि मिड्डा को बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी।
इस मौके पर पूर्व जिलाध्यक्ष भारत भूषण मिड्डा, पार्टी उपाध्यक्ष प्रवीण जोड़ा, फतेहाबाद मंडल अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह, स्वतंत्र चौधरी, विज्ञान सागर बाघला, विनोद जग्गा, रामराज मेहता, सरदारी लाल, धनंजय अग्रवाल, राजेश चौधरी एवं मीडिया प्रभारी सत्य रावल सहित अनेक भाजपा नेता एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
फुलां के काम आया बराला का आशीर्वाद
वेद फुलां का नाम जिलाध्यक्ष के लिए जबसे उछला तभी से तय माना जा रहा था कि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला अपने गृह जिले में फ्री हैंड चाहते हैं।
बराला से वेद फुलां की नजदीकी किसी से छिपी नहीं है। तमाम कारणों को दरकिनार करते हुए फुलां के नाम पर जिलाध्यक्ष की मोहर आखिर लग गई।
हालांकि इस उठापटक में निवर्तमान जिलाध्यक्ष भारतभूषण मिड्डा को अब कहां एडजस्ट किया जाएगा, इस पर भी चर्चे शुरू हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार मिड्डा को सीएम का ओएसडी बनाया जा सकता है।
मिड्डा सीएम खट्टर के करीबी भी हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि फतेहाबाद जिलाध्यक्ष पद के लिए जोर आजमाइश दिल्ली दरबार तक हुई है जिसमें आखिरी जीत टोहाना वालों की हुई।
फतेहाबाद से जिलाध्यक्ष चुने जाने की थी संभावना लेकिन...
बीते दिन भाजपा नेत्री सुनीता दुग्गल को अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग का चेयरमैन बनाया गया तो ये माना जा रहा था कि रतिया को सरकार में हिस्सा देने के बाद अब फतेहाबाद को संगठन की कमान दी जाएगी।
लेकिन वेद फुलां को जिलाध्यक्ष बनाने के साथ ही बीजेपी ने सरकार में हिस्से के साथ संगठन की कमान भी रतिया इलाके को ही सौंप दी।
हालांकि फतेहाबाद के नेता एवं कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे पर खुलकर तो विरोध नहीं जताया है लेकिन कुछ नेताओं ने नाम न छापने की शर्त पर अनौपचारिक बातचीत में इसे गलत करार दिया है।
कार्यकर्ताओं से सामंजस्य बनाना चुनौती
बीते दिनों प्रदेश प्रभारी अनिल जैन के सामने पंचायत भवन में कार्यकर्ताओं ने जमकर अपनी भड़ास निकाली थी। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाए थे कि जिले के अफसर तो दूर, छोटे-छोटे कर्मचारी भी भाजपा नेताओं की नहीं सुनते हैं।
ऐसे में अफसरों के सताए भाजपा वर्कर्स को संभालना नए जिलाध्यक्ष वेद फुलां के लिए बड़ी चुनौती होगी। उधर पंचायत चुनाव भी सिर पर हैं।
टोहाना में प्रदेशाध्यक्ष, रतिया में जिलाध्यक्ष, फतेहाबाद के हाथ खाली
टोहाना में प्रदेशाध्यक्ष के बाद रतिया को ही सरकार और संगठन में हिस्सा मिलने के बाद फतेहाबाद भाजपा के नेता मायूस हैं। ऐसे में नए जिलाध्यक्ष को ही उन्हें संभालना होगा।
वैसे इस स्थिति से बचने के लिए फतेहाबाद भाजपा के नेताओं को जिले की टीम में सम्मान जनक पद दिए जाने की भी पूरी संभावना है।
जिसने पढ़ाई राजनीति, उसी के जिलाध्यक्ष बने वेद फुलां
भाजपा जिलाध्यक्ष बने वेद फुलां भाजपा नेत्री स्वतंत्र चौधरी के विद्यार्थी रहे हैं। स्वतंत्र चौधरी राजनीति में आने से पहले शिक्षा विभाग में राजनीति शास्त्र की अध्यापिका थी।