यूवी-सैनिटाइजर वैन मॉडल दिखाता छात्र खुशप्रीत।
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आपदा में अवसर पैदा करना हुनरमंद लोगों के लिए मुश्किल नहीं होता है। ऐसा ही हुनर पेश किया है गांव अहरवां के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की नौंवी कक्षा के छात्र खुशप्रीत ने। खुशप्रीत ने केमिकल की बजाय परा बैंगनी किरणों (अल्ट्रा वायलेट) से सड़कों पर फैले कोरोना वायरस व अन्य बैक्टीरिया को खत्म करने का तरीका सुझाया है। खुशप्रीत ने स्कूल के ही केमिस्ट्री प्राध्यापक डॉ. महेंद्र सिंह के आइडिया पर यूवी सैनिटाइजर वैन मॉडल पेश किया है जिसे जिला स्तर की विज्ञान प्रतियोगिता में प्रथम स्थान मिला है। अब यह मॉडल प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता के लिए भेजा गया है।
कोरोना महामारी के शुरुआती दौर में केमिकल डालकर सड़कों पर बड़े पैमाने पर छिड़काव किया गया। इस छिड़काव के जरिये कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने की कोशिश हुई। यहीं से डॉ. महेंद्र सिंह को आइडिया सूझा। इसके बाद उन्होंने छात्र खुशप्रीत के साथ मिलकर यूवी सैनिटाइजर वैन मॉडल बनाया। उनके मुताबिक किसी भी गाड़ी के नीचे तीन अल्ट्रा वायलेट बल्ब लगाकर आसानी से सड़कों को वायरस मुक्त बनाया जा सकता है। यह बल्ब लगाकर जिन-जिन गलियों या सड़कों से गाड़ी गुजरेगी, वह एरिया वायरस मुक्त हो जाएगा।
प्राध्यापक डॉ. महेंद्र सिंह व खुशप्रीत दावा करते हैं कि आरओ में लगने वाले यूवी बल्ब भी इस काम के लिए प्रयोग किए जा सकते हैं। यह एक बल्ब 400 से 500 रुपये कीमत का है। एक कार के नीचे तीन यूवी बल्ब लगाने से यह काम आसानी से हो जाएगा। इस तरह एक यूवी सैनिटाइजर मॉडल वैन या कार तैयार करने पर मात्र 1500 रुपये खर्च आएगा।
खुशप्रीत का मॉडल शानदार है। केमिकल का छिड़काव करते समय आंखों में जलन या अन्य दुष्प्रभाव का खतरा रहता है। मगर यूवी सैनिटाइजर बिना किसी खतरे के सबसे कारगर प्रक्रिया है। अमेरिका में भी अस्पतालों को सैनिटाइज करने के लिए वहां यूवी सैनिटाइजर का प्रयोग किया गया है। -डॉ. महेंद्र सिंह, केमिस्ट्री प्राध्यापक, रावमा विद्यालय, अहरवां।