फतेहाबाद। निरक्षरों को साक्षर बनाने के लिए शिक्षा विभाग की तरफ से रविवार को जिले के 225 केंद्रों पर परीक्षा ली गई। उल्लास कार्यक्रम के तहत आयोजित हुई परीक्षा में करीब 3542 निरक्षर शामिल हुए। हालांकि विभाग की तरफ से 10 हजार निरक्षरों को परीक्षा में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया था।
परीक्षा सुबह 9 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक आयोजित हुई। परीक्षा में महिलाओं ने भी भी भागीदारी दिखाई। नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ ओपन स्कूल (एनआईओएस) ने पहले चरण की प्रारंभिक परीक्षा ली। परिणाम जारी होने के बाद शिक्षार्थियों को कक्षा तीसरी का सिलेबस करवाया जाएगा और इसकी परीक्षा मार्च में संभावित है।
परीक्षा को लेकर खंड शिक्षा अधिकारियों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया। कलस्टर इंचार्ज को पर्यवेक्षक लगाया गया। इस दौरान सरकारी स्कूलों के शिक्षक भी मौजूद रहे।अधिकारियों की माने तो पहली कक्षा का सिलेबस करवाया गया। इन्हें हिंदी का अक्षर ज्ञान, गणित में संख्याओं की पहचान करना आदि सिखाया गया। इस परीक्षा के बाद विभाग तीसरी कक्षा का पाठ्यक्रम करवाएगा।
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8650 को दिया गया अक्षर ज्ञान :
उल्लास कार्यक्रम के तहत शिक्षा विभाग ने सर्वे करवाया तो जिले में करीब 8650 निरक्षर मिले। इसमें शहर के मुकाबले ग्रामीणों की संख्या ज्यादा रही। इन्हें पढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग ने स्वयंसेवी शिक्षक लगाए। इसमें घर के ही पढ़े-लिखे सदस्य को शामिल किया गया। कम से कम पांचवीं पास को स्वयंसेवी शिक्षक नियुक्त किया गया। खास बात यह रही कि विभाग की तरफ से इन्हें पढ़ाने के लिए शिक्षण सामग्री उपलब्ध नहीं करवाई।
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97 साल की जेतना ने पेश की मिसाल
उल्लास कार्यक्रम के तहत सबसे ज्यादा उम्र की जेतना देवी ने भी परीक्षा दी। जेतना परीक्षा देने के लिए ढाणी मियाखां के स्कूल में बनाए गए केंद्र पर पहुंची। जेतना देवी में परीक्षा को लेकर उत्साह दिखा। जेतना देवी को उनके परिवार के सदस्यों ने ही अक्षर ज्ञान दिया। जेतना ने कहा कि उम्र के आखिरी पड़ाव पर उसे पेपर देते हुए अच्छा लग रहा। कोई ये नहीं कहेगा कि पढ़ी-खिली नहीं थी।
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जिले में ये निरक्षर देंगे परीक्षा
खंड निरक्षर मिले
भट्टूकलां 1800
भूना 600
फतेहाबाद 3000
जाखल 450
रतिया 2200
टोहाना 600
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शिक्षा विभाग की तरफ से उल्लास कार्यक्रम के तहत नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ स्कूलिंग की तरफ परीक्षा ली गई है। परीक्षा में जो उतीर्ण होंगे उन्हें प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।
- पवन सागर, जिला समंवयक, उल्लास कार्यक्रम