फतेहाबाद। जाखल पुलिस ने ऑपरेशन हॉटस्पॉट डोमिनेशन अभियान के तहत चावल निर्यात का झांसा देकर प्रदेशभर की राइस मिलों से करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधीक्षक सिद्धांत जैन ने वीरवार को पुलिस लाइन के सभागार में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस बारे में जानकारी दी।
एसपी जैन ने बताया कि पुलिस ने बुधवार को एक महिला आरोपी मनीषा और करनाल निवासी संदीप उर्फ मोनू को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 10,000 चावल के कट्टे बरामद किए हैं। इनकी बाजार कीमत लगभग 5 करोड़ रुपये बताई जा रही है। जाखल थाना पुलिस विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच कर रही है।
पुलिस ने बुधवार को ही दोनों को कोर्ट में पेश किया। जहां से महिला आरोपी मनीषा को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया, जबकि संदीप उर्फ मोनू को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस अब इस मामले में तीन अन्य आरोपियों अंकुर, अंकित और साहिल की तलाश कर रही है। ठगी का यह मामला जाखल की लक्ष्मी राइस मिल के प्रोपराइटर अमर जिंदल की शिकायत पर सामने आया।
अमर जिंदल ने पुलिस को शिकायत दी थी कि कि आरोपी दुबई के मो. शेख अब्दुल खान के नाम पर चावल निर्यात का बहाना बनाकर उससे धोखाधड़ी कर रहे थे। एसपी सिद्धांत जैन ने बताया कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि संदीप आदतन अपराधी है और उसके खिलाफ टोहाना, पातड़ा और असंध के थानों में पहले भी प्राथमिकी दर्ज हैं।
एसपी के अनुसार गिरोह के सदस्य राइस मिल मालिकों को अंतरराष्ट्रीय निर्यात का झांसा देकर चावल ले जाते थे। चोरी किया गया चावल पानीपत के छाजपुर स्थित हैफेड गोदाम में छिपाया जाता था।
इन मिलों से हुई ठगी की पुष्टि
अब तक जिन राइस मिलों से ठगी की पुष्टि हुई है, उनमें जेनव, महादेव, स्वास्तिक, केशव (चीका) से, गोयल इंटरनेशनल (असंध) से 70 लाख, लक्ष्मी राइस मिल (जाखल) से 85 लाख, गोपाल राइस मिल (जाखल) से 35 लाख और मारुति राइस मिल (टोहाना) से 70 लाख की ठगी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार अभी तक की जांच में कुल ठगी रकम कई करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
महिला सरगना करती थी सौदे, बाकी करते थे कट्टे छिपाने का इंतजाम
पुलिस अधीक्षक सिद्धांत जैन ने बताया कि जांच में सामने आया है कि गिरोह में महिला आरोपी मनीषा सौदे तय करती थी, जबकि संदीप और उसके साथी चावल के कट्टे छिपाने और आगे सप्लाई करने का काम संभालते थे। अन्य सदस्य अंकुर, अंकित और साहिल बिल्टी, परिवहन और लेन-देन का पूरा प्रबंधन करते थे। अभी ये तीनों पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी, वित्तीय लेन-देन और पूरी सप्लाई चेन की गहराई से जांच कर रही है।