पिछले तीन साल से ग्वार के गिरते दामों ने फतेहाबाद के व्यापारियों को अभी तक तकरीबन 50 करोड़ का नुकसान पहुंचा दिया है। राजस्थान में बरसात के कारण अधिक पैदावार होने के कारण ये नुकसान अभी और भी बढ़ सकता है। मंडी में ग्वार के दाम अब अपने सबसे निचले स्तर पर हैं। हालांकि जिले की मंडियों में ग्वार का स्टॉक करने वाले व्यापारी दबी जुबान में यह भी स्वीकार कर रहे हैं कि इसी सीजन में ग्वार अगर नहीं बिका तो रखरखाव एवं ब्याज के चलते नुकसान में इजाफा हो सकता है। इस समय मंडियों में तकरीबन 10 हजार क्विंटल ग्वार का स्टॉक बताया जा रहा है।
फतेहाबाद जिले के राजस्थान सीमा से सटे भट्टू कलां, भूना और फतेहाबाद के आसपास के किसानों में ग्वार की खेती के प्रति खासा रुझान है। इस साल 50 हजार एकड़ भूमि पर ग्वार की बिजाई की गई। हालांकि यह पिछले साल के मुकाबले कम है। इसकी मुख्य वजह ग्वार के दामों में काफी कमी आना है। वर्ष 2013 में ग्वार के दाम 25 से 30 हजार प्रति क्विंटल तक पहुंच गए थे जो अब गिरकर महज 32 सौ रुपये के आसपास लुढ़क गए हैं।
ग्वार के दामों में आई तेजी के चलते शहर के अनेक व्यापारियों ने इस उम्मीद में हजारों क्विंटल ग्वार का स्टाक कर लिया कि आने वाले समय में इसके दाम और भी अधिक बढ़ेंगे, लेकिन हुआ इससे बिल्कुल उलट। वर्ष 2013 के बाद की तेजी के बाद ग्वार के दाम छह हजार रुपये प्रति क्विंटल पर आकर टिक गए। तब व्यापारियों ने अचानक ही भाव तेजी होने की उम्मीद में इसका स्टॉक करना शुरू कर दिया। बताया गया है कि भट्टू, भूना, रतिया, फतेहाबाद, कुलां और धारसूल मंडी में करीब 10 से 12 हजार क्विंटल ग्वार का स्टॉक पड़ा हुआ है। व्यापारी तेजी होने की इंतजार करते रहे और अब तीन साल का अर्सा बीत गया, लेकिन ग्वार के भाव और भी अधिक औंधे मुंह लुढ़क कर महज 32 सौ तक आ गए हैं।
2013 में इराक के तेल कुंओं को लेप करने के लिए एकाएक बढ़ा था ग्वार का निर्यात
तीन वर्ष पूर्व खाड़ी देशों में तेल के कुएं पर लेप किया जाना था जो ग्वार की गम से तैयार होता है। जब खाड़ी देशों में इसकी खरीद शुरू हुई तो निर्यातक एवं सटोरियों सक्रिय हुए और ऊंची दामों में हुई खरीद के चलते ग्वार के दाम 30 हजार प्रति क्विंटल के भी पार जा पहुंचे। हालांकि, पक्के व्यापारी इसे महज सटोरियों की ही करामात बताते हैं। लेकिन बताया गया है कि निर्यात बंद होने के बाद इसके भावों में एकाएक मंदी का दौर आ गया है।
जिले की विभिन्न मंडियों में 6 हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से लगभग 10 हजार क्विंटल ग्वार का स्टॉक खरीदा गया था, जो तकरीबन 60 करोड़ बनती है। इस राशि का ब्याज भी 20 करोड़ तक बैठता है। ग्वार के इस स्टॉक की कीमत आज महज 32 करोड़ ही आंकी जा रही है।
इस बार राजस्थान के बाड़मेर, बीकानेर और जैसलमेर में बरसात होने के बाद ग्वार की अच्छी बिजाई हुई है जो दिसंबर के अंतिम सप्ताह तक बाजार में आ जाती है। इसके अलावा निर्यात की फिलहाल कोई संभावना ना होने के कारण ग्वार के भाव बढ़ने के अभी कोई आसार नहीं हैं।
मैसर्ज बजरंग लाल, ग्वार की निजी खरीद एजेंसी, फतेहाबाद
ग्वार के भाव ना मिलने से इस बार पिछले साल से ग्वार की आधी बिजाई हुई है। बीते वर्ष 70 हजार एकड़ में बिजाई हुई थी, जबकि इस बार यह आंकड़ा 50 हजार के पार भी नहीं जा सका।
बलवंत सहारण, कृषि उपनिदेशक, फतेहाबाद