जाखल। क्षेत्र के कई गांवों में खेतों में बिजाई की गई गेहूं की फसल में सुंडी का प्रकोप दिखाई दे रहा है। इससे किसानों की फसल बर्बाद हो रही है। इस तरह का दूसरा मामला अब क्षेत्र के गांव म्योंदकलां कलां में सामने आया है, जहां किसान ने खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को ट्रैक्टर चलाकर नष्ट कर दिया है।
गांव म्योंद कलां निवासी किसान हरनेक सिंह ने बताया कि उसने प्रशासन और कृषि विभाग के निर्देशों का पालन करते हुए करीब एक माह पूर्व खेतों में धान अवशेष (पराली) जलाए बगैर उसे मिट्टी में ही मिलाकर गेहूं की सीधी बिजाई की थी। पराली को उन्होंने गट्ठों के रूप में इकट्ठा करवाया था, लेकिन पराली में पलने वाले सुंडी के अंडे खेत में ही रह गए। इस वजह से अब सुंडी ने गेहूं की फसल पर हमला कर दिया है।
इससे उनकी पूरी फसल बर्बाद हो गई और लाखों रुपये का नुकसान हो गया है। इससे पहले पराली खेतों में ही मिला देने से गांव सिधानी में भी एक किसान की करीब 8 एकड़ फसल बर्बाद हो गई थी।
दवा छिड़काव का भी नहीं हुआ असर
किसान हरनेक सिंह, गुरमीत सिंह, तेज सिंह, दविंदर सिंह, सुखविंदर सिंह, गोबिंद सिंह, बिक्रम सिंह, जग्गा सिंह ने बताया कि उन्होंने गेहूं की फसल पर दवा, स्प्रे का छिड़काव करके भी देख लिया, लेकिन कोई उपाय काम नहीं आया। इस समस्या को कृषि विभाग के अधिकारियों से भी अवगत करवाया है। वह इसकी रिपोर्ट शासन स्तर तक भेजने की बात कह रहे हैं। पीड़ित किसान ने बताया कि फसल में सुंडी के प्रकोप के कारण उन्हें प्रति एकड़ करीब 15 हजार रुपये तक का नुकसान हुआ है। खराब हुई फसल पर ट्रैक्टर चलाकर उसे उखाड़ देने के बाद अब दोबारा से दोहरी मेहनत कर खेतों में गेहूं की बिजाई की है, लेकिन अब भी इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि फिर से सुंडी का हमला नहीं होगा। गेहूं उत्पादक किसान हरनेक सिंह ने सरकार से नुकसान की भरपाई की अपील की है।
पराली को खेत में मिला देने से क्षेत्र में कई जगह गेहूं की फसल में सुंडी का प्रकोप देखने को मिल रहा है। किसी जगह पर सुंडी का असर कम है तो कहीं ज्यादा। इसका उपाय यही है कि किसान फसल पर स्प्रे आदि का छिड़काव करें। इसकी शिकायत हमारे पास पहले भी आई है। इसकी रिपोर्ट बनाकर शासन-प्रशासन के स्तर तक भेजी गई है।
- मुकेश मेहला, उपमंडल कृषि अधिकारी, टोहाना।