फतेहाबाद। एचआईवी के बारे में बढ़ती जागरूकता का सकारात्मक असर दिख रहा है। जिले में गर्भवती की एचआईवी जांच अनिवार्य होने के बाद पिछले नौ वर्षों में 148 संक्रमित गर्भवती के घर स्वस्थ शिशुओं की किलकारी गूंजी है।
इस वर्ष भी अब तक 17 गर्भवती एचआईवी संक्रमित मिली हैं, जबकि 20 संक्रमित गर्भवती सुरक्षित प्रसव के साथ स्वस्थ शिशु को जन्म दे चुकी हैं। चिकित्सकों के अनुसार, गर्भवती में संक्रमण की पुष्टि होते ही उपचार शुरू कर दिया जाता है और प्रसव तक विशेष निगरानी रखी जाती है। यही कारण है कि जन्म लेने वाले शिशु जांच में पॉजिटिव नहीं मिल रहे हैं।
जन्म के बाद शिशुओं को लगभग छह माह तक दवा दी जाती है, जिससे संक्रमण की आशंका और कम हो जाती है। नागरिक अस्पताल फतेहाबाद में अब तक 10990 लोगों की एचआईवी जांच हो चुकी है, जिनमें 92 लोग पॉजिटिव मिले हैं। वहीं 8273 गर्भवती की जांच के दौरान 17 संक्रमित पाई गईं, जबकि अन्य केंद्रों में छह गर्भवती संक्रमित मिली हैं।
जिले के विभिन्न अस्पतालों में 12126 लोगों की जांच में 96 नए पॉजिटिव केस सामने आए हैं। इस तरह जिले में इस वर्ष अब तक 188 एचआईवी संक्रमित मरीज दर्ज किए जा चुके हैं।
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एआरटी को नहीं मिली मंजूरी
एआरटी (एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी) सेंटर खोलकर एचआईवी संक्रमितों को जांच और उपचार के लिए जिला मुख्यालय में सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए स्वास्थ्य विभाग प्रशासन ने पिछले साल प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा था। यहां से नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (नाको) को प्रस्ताव गया लेकिन मंजूरी नहीं मिली है। फिलहाल संक्रमितों को जांच और उपचार के लिए हिसार-सिरसा या फिर रोहतक पीजीआई जाना पड़ रहा है। जिला मुख्यालय में फिलहाल लिंक एआरटी सेंटर है। एआरटी में करीब एक साल तक दवाई लेने के बाद मरीज को लिंक एआरटी पर रेफर किया जाता है।
पिछले 10 सालों में आए एचआईवी के मामले
वर्ष संक्रमित मिले पुरुष महिला मौत
2015-16 75 46 29 1
2016-17 66 42 24 5
2017-18 73 55 18 3
2018-19 126 94 32 6
2019-20 120 87 33 6
2020-21 77 53 24 1
2021-22 174 139 85 0
2022-23 195 161 34 2
2023-24 147 131 16 3
2024-25 206 155 51 0
2025-26 188 140 48 0
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एचआईवी संक्रमित इन गर्भवती ने दिया स्वस्थ शिशु को जन्म
वर्ष डिलीवरी
2017 5
2018 6
2019 8
2020 7
2021 19
2022 22
2023 32
2024 23
2025 26
गर्भवती समय पर जांच करवाए तो स्वस्थ शिशु का हो सकता है जन्म
नागरिक अस्पताल में चल रहे एकीकृत जांच एवं सलाह केंद्र के काउंसलर रमेश कुमार का कहना है कि गर्भवती को पंजीकरण के साथ ही जांच करवाना जरूरी है। अगर जांच में एचआईवी पॉजिटिव मिलती है तो उसका समय पर उपचार शुरू हो सकता है और स्वस्थ शिशु को जन्म दे सकती है।
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सिरिंज धकेल रही मौत के मुंह में
नशा भी युवाओं को एचआईवी संक्रमित बना रहा है। नशा मुक्ति केंद्र में चल रहे ओएसटी में पिछले साल तक 343 मरीजों का उपचार शुरू हुआ है। इन मरीजों की जांच के बाद 59 एचआईवी संक्रमित मिले है। काउंसिलिंग में सामने आ रहा है कि कई युवा हेरोइन नशा लेने के लिए एक ही सिरिंज का प्रयोग करते हैं।
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ऐसे फैलता है एचआईवी
- एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध से
- एचआईवी संक्रमित रक्त एवं रक्त उत्पाद से
- एचआईवी संक्रमित सुईयों व सिरिंज के इस्तेमाल से
जिले में एचआईवी के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है। स्कूलों व कॉलेजों में शिविर लगाए जा रहे हैं। अस्पताल में मरीजों की जांच की जा रही है ताकि पता चल सके और समय पर उपचार शुरू हो सके। एचआईवी के प्रति जागरूकता होना जरूरी है।
-डॉ. बुधराम, सिविल सर्जन