फतेहाबाद। कंपनियों और डीलरों की नाइंसाफी का शिकार हुए उपभोक्ताओं को उनका हक दिलाने में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग अहम भूमिका निभा रहा है। इस साल 1 जनवरी से 31 अक्तूबर तक आयोग ने 507 उपभोक्ताओं को न्याय दिलाने का काम किया है। आयोग की ओर से निपटाए गए अधिकांश मामले फसल बीमा या इंश्योरेंस कंपनियों से जुड़े हुए रहे।
दरअसल, जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में इस साल 1 जनवरी से 31 अक्तूबर तक 294 केस नए आए जबकि पिछले साल 31 दिसंबर 2023 तक 1001 केस लंबित थे। इसी साल उपभोक्ता आयोग द्वारा 507 केस निपटाए गए हैं। अभी भी 788 केस लंबित हैं। इस समय आयोग के अध्यक्ष राजबीर सिंह व सदस्य केएस निरानियां हैं, जो मामलों की सुनवाई करते हैं। संवाद
-
उपभोक्ता आयोग में पैरवी के लिए वकील की भी जरूरत नहीं
उपभोक्ता आयोग में जाने के लिए उपभोक्ता को पैरवी के लिए वकील करने की भी जरूरत नहीं होती हैं। उपभोक्ता स्वयं एक कागज पर लिखकर शिकायत दर्ज करवा सकता है। यदि किसी व्यक्ति का पांच लाख तक की राशि का कोई केस है, तो उसके लिए कोई फीस नहीं है। पांच लाख से ऊपर दस लाख रुपये तक 200 रुपये की फीस है। दस लाख से ऊपर बीस लाख तक 400 रुपये, बीस लाख से ऊपर पचास लाख रुपये तक 1000 रुपये की फीस रखी गई है। 50 लाख से दो करोड़ रुपये तक के मामलों की सुनवाई राज्य आयोग में होती है जबकि इससे अधिक की राशि के मामले राष्ट्रीय आयोग में जाते हैं।
आयोग में शिकायत करनी हो तो बिल जरूर लें उपभोक्ता
जिलास्तर पर उपभोक्ता आयोग को 50 लाख तक के केस सुनने की अथॉरिटी होती है। मगर आयोग में शिकायत करने के लिए उपभोक्ता के पास खरीदी गई वस्तु या अन्य सामान की रसीद या बिल अवश्य होना चाहिए। आयोग लगातार उपभोक्ताओं को सामान खरीदते समय दुकानदारों से उसका बिल अवश्य लेने के लिए जागरूक भी करता है।
-
:: जब से उपभोक्ता आयोग आया है, इसमें बहुत जल्दी-जल्दी अच्छे तरीके से शिकायतों का निपटान हुआ है। इससे पहले पूरा फॉर्म न होने के कारण शिकायतों का निपटारा होने में विलंब होता था। उपभोक्ताओं को काफी लंबा इंतजार करना पड़ता था। मौजूदा आयोग की कार्यशैली से शिकायतों का निपटारा व केसों की कार्रवाई सुचारू रूप से अतिशीघ्र होने लगी है। इससे उपभोक्ताओं को काफी लाभ पहुंचा है।
-प्रदीप बैनीवाल, प्रधान, जिला बार एसोसिएशन, फतेहाबाद।