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31 साल पहले तैयार की थी फर्जी वसीयत, अब जाकर महिला और दो बेटों को तीन-तीन साल की कैद

Sat, 13 May 2017 12:39 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला फतेहाबाद
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31 साल पहले बनाई गई एक फर्जी वसीयत मामले में फतेहाबाद की एक अदालत ने एक महिला एवं उसके दो बेटों को तीन-तीन साल की कैद की सजा सुनाई है। इस मामले में साल 2013 में मुकदमा दर्ज हुआ था।
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साल 2013 में गांव एमपी रोही निवासी महेंद्र कुमार ने पुलिस को शिकायत थी कि महिला कमला देवी एवं उसके दो बेटों मंगत व संगत ने उसके पिता की फर्जी वसीयत तैयार कर उसकी जमीन हड़प ली है। आरोप है कि कमला एवं उसके दो बेटों ने साल 1986 में ही महेंद्र के पिता दुलासिंह की एक फर्जी वसीयत तैयार कर ली और 2007 में इसी वसीयत के आधार पर दुलासिंह की 13 कनाल और 4 मरले जगह में से एक चौथाई हिस्सा अपने नाम रजिस्टर्ड करवा लिया। महेंद्र के अनुसार उसके पिता दुलासिंह ने कभी इस बात का जिक्र ही उससे नहीं किया। इस पर शक होने पर जब उसने वसीयत की जांच करवाई तो पता चला कि वसीयत में उसके पिता दुलासिंह की ओर से पंजाबी में हस्ताक्षर किए गए हैं, जबकि उसके पिता केवल उर्दू में ही हस्ताक्षर किया करते थे। वसीयत के फर्जीवाड़े का खुलासा उस समय हुआ जब वसीयत करने के समय जिन दो गवाहों की गवाही दिखाई गई। उसमें एक गवाह की मौत वसीयत की तिथि से पहले ही हो चुकी थी। इन बातों के आधार पर महेंद्र ने कमला एवं उसके बेटों के खिलाफ साल 2013 में मामला दर्ज करवाया था। इसकी सुनवाई करते हुए शुक्रवार को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विकास गुप्ता की अदालत ने धोखाधड़ी के आरोपों को सही पाते हुए आरोपी कमला, उसके दोनों बेटों संगत एवं मंगत को 3-3 साल की कैद और छह हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
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