फतेहाबाद। जिले में वर्षों से बह रही घग्घर नदी और यमुना नहर की शाखाएं हैं। इसके बावजूद जिले के कई किसानों के खेतों तक नहरी पानी नहीं पहुंच पाया है। आजादी के 77 वर्ष बीत जाने के बाद भी हर खेत तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका है। इस कारण अभी भी जिले में 29000 हजार एकड़ रकबा ऐसा है, जो बारानी पड़ा है। यहां नहरी पानी नहीं पहुंचा है।
नहरी पानी नहीं पहुंचने के कारण यह रकबा सिंचाई के लिए या तो बारिश पर आधारित है या फिर ट्यूबवेलों की सिंचाई पर निर्भर है। बारिश होने पर ही किसान कुछ अनाज पैदा कर पाते हैं। जिले में पिछले दो सालों में 1080 एकड़ के बारानी रकबे को नहरी किया गया है। बारानी से नहरी किए गए रकबे में सबसे ज्यादा रकबा खेड़ी डिस्ट्रीब्यूटरी का है और सबसे कम रकबा मोहम्मदपुर डिस्ट्रीब्यूटरी का है।
राजस्थान व पंजाब सीमा से सटे गांवों का है ज्यादातर रकबा
सिंचाई विभाग के अनुसार बारानी रकबे में कुछ जमीन पंचायती है तो ज्यादातर रकबा राजस्थान और पंजाब की सीमा से सटे गांवों का है। खेड़ी डिस्ट्रीब्यूटरी में भट्टू क्षेत्र के गांव भट्टू, मेहूवाला, बनमंदोरी, पीलीमंदोरी, दैयड़, रामसरा और ढाबी कलां शामिल हैं जबकि मोहम्मदपुर डिस्ट्रीब्यूटरी में रतिया क्षेत्र का रकबा शामिल है। इन गांवों के किसानों ने उम्मीद जताई है कि एक दिन बारानी रकबे तक नहरी पानी पहुंचेगा और उनके खेत भी फसलों से लहलहाएंगे।
नहर की सीमा पर लगते खेत भी सूखे
भट्टू क्षेत्र के गांव मेहूवाला और बनमंदोरी के किसान कुलदीप, सुरेंद्र सिंह, राजबीर, पृथ्वी सिंह और मोहर सिंह बताते हैं कि उनके खेत नहर की पटरी को छूते हैं। मगर फिर भी उनके खेतों काे नहरी पानी नहीं मिल सका है। इसके लिए किसानों ने कई बार सिंचाई विभाग के अधिकारियों और नेताओं से बातचीत की है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है। सिंचाई के पानी की किल्लत के चलते उन्हें ट्यूबवेलों से सिंचाई करनी पड़ रही है। अगर नहर का पानी खेतों को मिल जाए तो वह भी अच्छी फसलें लेकर अपना जीवन यापन और बेहतर तरीके से कर सकते हैं।
जिले में मेरी हाल ही में नियुक्ति हुई है। इस विषय की जानकारी ली जाएगी। फिलहाल आचार संहिता लगी हुई है। इसके बाद प्रयास सिरे चढ़ाने के लिए प्रक्रिया अपनाई जाएगी। हर खेत तक पानी पहुंचाने के लिए सरकार व विभाग पूरी तरह प्रयासरत है।
एनके भोला, एक्सईएन, सिंचाई विभाग, फतेहाबाद