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लॉकडाउन में खूब हुई नशा तस्करी

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कोरोना महामारी के दौरान लागू हुए लॉकडाउन उम्मीद थी कि नशा पर लगाम लगेगी, लेकिन नशा की तस्करी अन्य दिनों के मामले में बढ़ी और नशा लेने वाले लोगों में भी इजाफा हुआ। खुद पुलिस महकमे के आंकड़े इस बात को ब्यां कर रहे हैं कि किस तरह से नशा की तस्करी हुई। ऐसे में ये भी स्वाभाविक है कि लोगों तक नशा आसानी से पहुंचा। इसकी गिरफ्त में आए नशेड़ियों को नशा छोड़ने का मौका नहीं मिला। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने इस दौरान नशा मुक्ति केंद्र को ही बंद कर दिया। पहले बजट के अभाव में 30 से 10 बेड कर दिया और अब आइसोलेशन वार्ड बनाने का हवाला देकर 10 बेड की जगह भी ले ली गई है।
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नशा से जुड़े मरीजों को दाखिल करने के लिए न बेड है और न जगह। नशा के मरीजों को को लेकर चर्चा में रहने वाले जिले में एकमात्र नशा मुक्ति केंद्र को भी खत्म कर दिया गया है।
रोजाना 80 से 90 ओपीडी : नशा से संबंधित मरीजों की रोजाना 80 से 90 मरीजों की ओपीडी आ रही है। लॉकडाउन के दौरान जब जनरल ओपीडी बंद की गई थी तब भी 40 से 50 मरीजों की ओपीडी जारी थी। अब हेरोइन, एल्कोहल, अफीम, गांजा और मेडिकल नशा से जुड़े मरीज रोजाना आ रहे हैं लेकिन जगह के अभाव में दवा देकर घर भेजा जा रहा है।
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लॉकडाउन में कोई एंबुलेंस में तो कोई कैंटर में छिपाकर लाया हेरोइन : लॉकडाउन के दौरान पुलिस प्रशासन की तरफ से बेशक सख्ती थी लेकिन शातिर तस्करों ने हेरोइन तस्करी में कमी नहीं छोड़ी। दो माह के दौरान तस्कर एंबुलेंस में तो कोई पुलिसकर्मी का सहारा लेकर हेरोइन लाया। 3 मई को पुलिस ने एंबुलेंस में सवार तीन युवकों को 120 ग्राम हेरोइन के साथ पकड़ा था। सीआईए ने भूना में 900 ग्राम हेरोइन के साथ तीन युवकों को पकड़ा। टोहाना में पुलिस ने 938 ग्राम हेरोइन के साथ यूपी के दो पुलिस कर्मियों को पकड़ा। एंटी नारकोटिक्स टीम ने कैंटर सवार तीन युवकों को 688 ग्राम हेरोइन के साथ पकड़ा।
लॉकडाउन के दौरान ये पकड़ा गया नशा
हेरोइन - 3 किलो 200 ग्राम
चूरापोस्त - 38 किलोग्राम
अफीम - 3 किलो 95 ग्राम
गांजा - 105 ग्राम
नशीली गोलियां - 8030
अफीम के पौधे - 225
अवैध शराब - 7430 अंग्रेजी,
अवैध लाहन - 12060 किलोग्राम
चलती भट्टी- 9
लॉकडाउन से पहले नशा मुक्ति में दाखिल हुए मरीज :
मई 2018 से 18 मार्च 2020 - 825
रोजाना ओपीडी - 80 से 90
20 की स्वीकृति नहीं मिली तो 10 बेड को जगह का इंतजार : जिला की बहुप्रतीक्षित मांग को पूरा करते हुए पुराना सिविल सर्जन कार्यालय को नशा मुक्ति केंद्र बनाया गया। 10 बेड से बढ़ाकर इसे 30 बेड किया गया। लेकिन अप्रैल माह में मंजूरी न मिलने के कारण 20 बेड का बजट नहीं आया और वापस 10 बेड का हो गया। कोरोना महामारी के चलते स्वास्थ्य विभाग ने नशा मुक्ति केंद्र की ब्रांच को आइसोलेशन वार्ड में तब्दील कर दिया। लेकिन नशा मुक्ति केंद्र को जगह नहीं दी गई। पहले नर्सिंग हॉस्टल को नशा मुक्ति केंद्र के लिए जगह देने की प्लानिंग थी लेकिन उसे अब स्कूल हेल्थ को जगह दे दी गई। इसके चलते अब नशा मुक्ति केंद्र के पास न जगह है और न बेड हैं। मरीज आ रहे हैं और दवा लेकर वापस जा रहे हैं।
इसलिए है नशा मुक्ति केंद्र की जरूरत : नशा की लत से जुड़े मरीज को डॉक्टरों की निगरानी में नशा मुक्ति केंद्र में रखा जाता है। यहां पर मरीज को 14 दिन तक दवा दी जाती है। इसके अलावा कॉउंसलिंग की जाती है। 14 दिन की दवा देने के बाद समीक्षा की जाती है कि मरीज किस स्थिति में है। इसके बाद मरीज की डोज कम करके डिस्चार्ज किया जाता है। यहां पर मरीज रहने व खाने पीने की व्यवस्था भी उपलब्ध करवाई जाती है।
नशा मुक्ति केंद्र की जगह को लेकर टीम के साथ सलाह चल रही है। खैरातीखेड़ा, अहरवां और नागपुर पीएचसी खाली हैं, इन जगहों पर इस्तेमाल किया जा सकता है। फिलहाल अभी समीक्षा की जाएगी। - डॉ.मनीष बंसल, सिविल सर्जन, फतेहाबाद।
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