फतेहाबाद। शहर के अशोक नगर मोहल्ला में राजकीय मॉडल संस्कृति माध्यमिक विद्यालय का दो शिफ्टों में संचालन किया जा रहा है। प्राइमरी स्कूल के बच्चों को सुबह के समय में व मिडिल क्लास के विद्यार्थियों को शाम के समय बुलाया जा रहा है।
इस विद्यालय में प्राइमरी लेवल के कुल 250 विद्यार्थी और मिडिल लेवल में 200 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। ऐसे में इन विद्यार्थियों को 22 कक्षाओं की जरूरत है, लेकिन स्कूल में मात्र 12 ही क्लास रूम हैं। वहीं स्कूल में जगह कम होने से बच्चों की खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन नहीं हो पा रहे हैं। इससे बच्चों की प्रतिभा नहीं उभर पा रही है। हालांकि स्कूल प्रबंधन की ओर से कई बार मांग उच्च स्तर पर भेजी जा चुकी है।
बता दें कि अशोक नगर में स्थित राजकीय मॉडल संस्कृति मिडिल स्कूल में पहली से आठवीं कक्षा के 450 बच्चे हैं, जिनको पढ़ाने के लिए 11 लेक्चरर और प्राइमरी के लिए 17 जेबीटी हैं। स्कूल में कुल 16 कमरे हैं, जिसमें स्टाफ के 2 कमरे और मिड डे मील के लिए 2 कमरे हैं। ऐसे में केवल 12 कक्षा में कक्षाओं का संचालन होता है। जबकि स्कूल में कुल 24 कमरों की आवश्यकता है। कमरों की कमी के कारण स्कूल को मजबूरन दो शिफ्टों में चलाया जा रहा है। इसमें पहली शिफ्ट में प्राइमरी स्कूल के 250 बच्चों की कक्षाएं लगती तो दूसरी शिफ्ट में 200 बच्चों की कक्षाएं लगती हैं।
इसको लेकर स्कूल के अध्यापकों ने बताया कि स्कूल के प्रागंण में सुबह के समय प्रार्थना के लिए जगह नहीं है और स्कूल भवन कम जगह में बना होने से आवाज गुंजती है, जिससे स्कूल में शोर ज्यादा होता है। ऐसे में प्राइमरी स्कूल या फिर मिडिल स्कूल को ठाकर बस्ती के स्कूल में नए कमरों का निर्माण करके शिफ्ट किया जाए ताकि स्कूल के संचालन के दौरान कोई परेशानी ना हो।
स्कूल के मुख्य अध्यापक श्रीराम ने बताया प्रशासन के आदेश पर दो शिफ्ट में स्कूल किया गया है। उन्हें जैसा आदेश मिलेगा वो उसी अनुरूप काम करेंगे। कमरों की कमी के चलते एक साथ सभी कक्षाओं का संचालन करना उनके लिए चुनौती है। स्कूल में कुल 450 बच्चे है वहीं, अब तक स्कूल में दाखिले चालू हैं। इससे स्कूल में और बच्चे बढ़ने की संभावना है।
:: शहर में केवल एक ही स्कूल है जो दो शिफ्टों में जारी है। स्कूल में भवन की कमी लेकर स्कूल का मुआयना किया जाएगा और स्कूल एसएमसी टीम की सलाह के बाद स्कूल को अन्य स्थान पर शिफ्ट किया जा सकेगा। वहीं स्कूल में अध्यापकों बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त बैंच है।
- संगीता बिश्नोई, जिला शिक्षा अधिकारी, फतेहाबाद।