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Fatehabad News: विशेषज्ञ कक्ष के बाहर नहीं बैठने की व्यवस्था, जमीन पर बैठ किया बारी का इंतजार

Thu, 17 Jul 2025 11:14 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
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फतेहाबाद के नागरिक अस्पताल में मूल्यांकन करवाने के लिए विशेषज्ञ कक्ष के बाहर नीचे बैठे बच्चे व
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फतेहाबाद। समग्र शिक्षा विभाग ने वीरवार को नागरिक अस्पताल में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए जिलास्तरीय चिकित्सा मूल्यांकन शिविर का लगाया गया। इस दौरान पर काफी अव्यवस्था नजर आई। वहां पर अभिभावकों और विद्यार्थियों के लिए बैठने तक की व्यवस्था नहीं थी।
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पहले दिन खंड फतेहाबाद और भट्टूकलां के दिव्यांग विद्यार्थियों का मूल्यांकन किया गया। मूल्यांकन के लिए विद्यार्थियों और उनके साथ आए अभिभावकों को परेशानी झेलनी पड़ी। मूल्यांकन के लिए विद्यार्थियों और अभिभावकों को जमीन पर ही बैठकर 30 से 40 मिनट तक अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा।
पहले दिन 59 विद्यार्थियों का मूल्यांकन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि जिला परियोजना संयोजक नरेंद्र कुमार ने किया। इस मौके पर खंड शिक्षा अधिकारी विजय कुमार एवं प्राचार्य हरविन्द्र सिंह विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित हुए।
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हिसार व सिरसा से बुलाए गए विशेषज्ञ
शिविर के दौरान डॉ. गिरीश, डॉ. गुरविंद्र कौर, डॉ. हिमांशी, डॉ. राकेश, कमलेश सहित अन्य चिकित्सकों ने अपनी सेवाएं प्रदान की। ईएनटी डॉ. जयप्रकाश के छुट्टी पर होने के कारण सिरसा से डॉ. पंकज की ड्यूटी लगाई गई। इसके अलावा हड्डी रोग विशेषज्ञ के न होने के कारण हिसार से डॉ. सुरेश पुहंचे। इसके अलावा समाज कल्याण विभाग एवं रोडवेज विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी भी इस कैंप में लगाई गई।
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25 से बढ़ाकर 100 रुपये किया डाइट खर्च
शिविर में आने वाले बच्चों के लिए समग्र शिक्षा विभाग ने दो साल पहले 25 रुपये प्रति छात्र डाइट का बजट जारी किया था, अब इसे बढ़ाकर 100 रुपये कर दिया गया है। विभाग की तरफ से शुक्रवार लगने वाले शिविर में रतिया और भूना व शनिवार को टोहाना व जाखल के दिव्यांग विद्यार्थियों को मूल्यांकन के लिए बुलाया गया है।
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शिविर में पहले दिन 59 दिव्यांग बच्चों का मेडिकल चेकअप किया गया है। जहां तक जमीन पर बैठने की बात है, बच्चों के लिए शिविर में कुर्सियां और पंखे लगाए गए हैं, लेकिन जल्दबाजी के चक्कर में अभिभावक अपने बच्चों को मूल्यांकन के लिए विशेषज्ञ के पास पहले ले जाते हैं, जबकि मूल्यांकन प्रक्रिया में नियम अनुसार समय लगता है। इंतजार में वे वहीं बैठे रहते हैं जबकि शिविर में पूरी व्यवस्था की गई है।
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-निहाल सिंह, सहायक परियोजना संयोजक
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