पिछले पांच साल से इस केन्द्र को दोबारा शुरू करने के प्रयास तक नहीं किए गए हैं। ये हालात तब हैं जब अपने वक्त में फतेहाबाद के नशा मुक्ति केन्द्र से शानदार रिजल्ट मिले थे।
रिकार्ड के मुताबिक 2000 में स्थापना से लेकर 2009 में बंद होने तक फतेहाबाद के नशा मुक्ति केन्द्र में तकरीबन 8 से 9 हजार लोगों ने नशा छोड़ा था।
नशे पर नियंत्रण की सरकारी कोशिशें इसलिए भी संदेह के घेरे में है क्योंकि प्रशासन महज डंडे के दम पर नशे पर नकेल कसना चाहता है। शायद तभी रतिया में नशा मुक्ति केन्द्र को सीएम की मौखिक मंजूरी के बावजूद शुरू नहीं किया जा सका।
प्रयास संस्था और रेडक्रास ने शुरू किया था केन्द्र
साल 2000 में फतेहाबाद में नशे का कारोबार चरम पर था। ऐसे में प्रशासन और प्रयास संस्था द्वारा मिलकर स्थानीय पंजाब एवं सिंध बैंक वाली गली में नशा मुक्ति केन्द्र की स्थापना की गई थी।
इस नशा मुक्ति केन्द्र में 15 बिस्तरों की व्यवस्था की गई थी। यहां दाखिल होने वाले मरीजों को खाने के अलावा, दवाइयां, आदि भी मुफ्त मुहैया करवाई जाती थी।
केन्द्र के लिए भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय से सालाना 8 लाख रुपये की ग्रांट मुहैया करवाई जाती थी।
रेडक्रास सोसाइटी की ओर से 11 लोगों का स्टाफ नियुक्त किया गया था। इसमें मेडिकल आफिसर, मनोरोग चिकित्सक, काऊंसलर, योगा एवं फिजियोथेरेपिस्ट, दो स्टाफ नर्स और वार्ड ब्वाय शामिल थे।
साल 2007-08 से नशा मुक्ति केन्द्र को आर्थिक समस्याएं आनी शुरू हो गई थी। हालात ये हो गए थे कि केन्द्र के पास स्टाफ को सैलरी देने लायक संसाधन भी नहीं थे। आखिरकार केन्द्र के सदस्यों को रेडक्रास सोसायटी के द्वारा भुगतान किया गया।
सीएम की मंजूरी के बाद भी फाइल कहां, किसी को मालूम नहीं
सीएम मनोहर लाल खट्टर के फतेहाबाद दौरे के दौरान तत्कालीन एसपी पारूल कुश जैन ने रतिया के लोगों की नशे की लत छुड़ाने के लिए रतिया में ही नशा मुक्ति केन्द्र स्थापित करने की मांग रखी थी जिसे सीएम ने मंजूर भी कर लिया था।
इसके बाद एसपी पारूल कुश जैन के तबादले के बाद ये मामला ठंडे बस्ते में चला गया। अब फिलहाल फतेहाबाद जिले में कोई भी नशा मुक्ति केन्द्र नहीं है।
इतना ही नहीं, साथ लगते हिसार जिले में चल रहा नशा मुक्ति केन्द्र भी कई साल पहले बंद किया जा चुका है। सिरसा जिला मुख्यालय की बजाए कालांवाली में नशा मुक्ति केन्द्र बाल भवन में चलाया जा रहा है।
रतिया और फतेहाबाद के लोगों को वहां ले जाकर भर्ती करवाना कई बार टेढ़ी खीर ही है।
ग्रांट के लिए भी बेलने पड़ते हैं उलटे-सीधे पापड़
जिला प्रशासन के कई अधिकारियों की मानें तो केन्द्र सरकार के न्याय एवं सामाजिक अधिकारिता विभाग से नशा मुक्ति केन्द्र की ग्रांट हासिल करना बहुत टेढ़ा काम है।
नाम न छापने की शर्त पर अधिकारियों ने बताया कि कई बार तो केन्द्र सरकार के अधिकारियों को चढ़ावा तक चढ़ाना पड़ता है।
हर साल ऐसा करना संभव नहीं होता। ग्रांट आने पर ही स्टाफ की सैलरी, दवाइयां और बाकी सुविधाएं मिल सकती हैं।
2000 से लेकर 2009 तक जिला नशा मुक्ति केन्द्र बहुत शानदार तरीके से चला। इस दौरान हजारों लोगों को नशे से मुक्ति दिलाई गई।
लेकिन केन्द्र सरकार से ग्रांट न आने के कारण मजबूरन इस केन्द्र को बंद करना पड़ा। अगर ग्रांट आती है तो दोबारा केन्द्र शुरू किया जा सकता है।
नरेश झांझड़ा, सचिव, रेडक्रास सोसाइटी, फतेहाबाद ।
नशा मुक्ति केन्द्र का मामला उपायुक्त के संज्ञान में लाया जाएगा। उम्मीद है कि जल्द इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल होगी।
संत लाल पचार, एसडीएम, फतेहाबाद ।
14एफटीबीपी33: जीटी रोड पर स्थित नशा मुक्ति केन्द्र पर लगा हुआ ताला ।