फतेहाबाद के पंचायत भवन में आयोजित गीता जयंती समारोह कार्यक्रम में लगी रानी बाला की स्टॉल पर साम
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फतेहाबाद। सास से शौकिया तौर पर रानीबाला ने अचार डालना सीखा। रानीबाला का बनाया अचार लोगों को इतना पसंद आया कि उनकी अच्छी मांग आसपास होने लगी। अचार से होने वाली आय से रानी बाला पति को भी आर्थिक तौर पर सहयोग करने लगी।
गांव म्योंद कलां निवासी रानीबाला ने बताया कि उसने अपनी सास से अचार बनाना सीखा। वह हर तरह का अचार बना लेती है। इसके अलावा वह पीसी हुई हल्दी, कच्ची हल्दी, गुड़ व शक्कर आदि भी बेचती हैं। वहीं वह घर पर ही कई प्रकार के मसाले भी पीसती हैं। इन सब चीजों को पहले वे सिर्फ अपने परिवार के लोगों को बेचती थी, जिसके बाद उसने आस-पास के दुकानदारों व गांव के आसपास लगने वाले मेले में अपना सामान बेचना शुरू किया। इन सब सामान को बेचकर वो अपना घर भी चला रही हैं। इससे उन्हें अच्छी आमदनी हो जाती है।
मिलने लगा प्रशासन का सहयोग
रानीबाला ने बताया कि जब उसने इन सब चीजों को बेचने की शुरुआत की थी, तब वे सिर्फ अकेली थी। बाद में पति सहित परिवार के अन्य सदस्यों ने इस काम में सहयोग करना शुरू किया। अब पिछले दो तीन सालों से कोई भी सरकारी कार्यक्रम होता है तो उन्हें अपना सामान बेचने के लिए जगह दी जाती है। पिछले साल दिसंबर में आयोजित हुए गीता जयंती समारोह में भी रानी बाला ने अपने अचार, हल्दी, गुड़ व शक्कर आदि बेचने के लिए स्टॉल लगाई थी। उपायुक्त मनदीप कौर ने उनके गुड़ की काफी तारीफ भी की थी।
दूसरी महिलाओं को भी कर रही हैं जागरूक
रानी बाला साधारण परिवार से संबंध रखती हैं। पति निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। पति के सहयोग को लेकर उन्होंने इस काम की शुरुआत की थी। शुरुआत में काम में थोड़ी बहुत दिक्कतें भी आई। अब उनका अचार व अन्य उत्पाद बेचने का काम अच्छा चल रहा है। स्वयं सहायता समूह से जुड़ी रानीबाला अन्य महिलाओं को भी अपना काम करने के लिए प्रेरित करती हैं। 35 वर्षीय रानीबाला ने बताया कि उसकी शादी को करीब 17 साल हो चुके हैं। परिवार में एक बेटी और एक बेटा है। बेटी बीएड कर रहीं है तो बेटा 9वीं कक्षा का विद्यार्थी है। दोनों बच्चे भी उनका इस काम में काफी सहयोग करते हैं। रानी बाला के अनुसार वैसे तो वह हर तरह का अचार डाल लेती हैं, पर उनका जो सबसे खास किस्म का अचार है वह नींबू का है। इसकी काफी मांग रहती है।