फतेहाबाद। लोगों को सुविधा देने के नाम पर लाए गए परिवार पहचान पत्र ने सालभर लोगों को रुलाने का काम किया। इसमें किसी का नाम गलत हो गया, तो किसी के परिजनों के नामों में त्रुटियां कर दी गईं। इन त्रुटियों को ठीक करवाने के लिए साल भर लोग सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटते रहे।
चुनाव से पहले प्रदेश सरकार ने समाधान शिविर लगाकर परिवार पहचान पत्र की त्रुटियां ठीक करवाईं। मगर पेचीदा मामलों का जिला स्तर पर कोई समाधान नहीं निकल सका।
गौरतलब है कि परिवार के सभी सदस्यों की जानकारी एक ही दस्तावेज में हो, इसके लिए प्रदेश सरकार ने परिवार पहचान पत्र यानी फैमिली आईडी बनानी शुरू की थी। इसी परिवार पहचान पत्र के आधार पर लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिए जाने का एलान किया गया।
बुजुर्गों को बुढ़ापा पेंशन, दिव्यांगों को पेंशन, बीपीएल परिवारों के लिए राशन कार्ड बनाने जैसे काम इस पत्र से जोड़ दिए गए। मगर इन परिवार पहचान पत्रों में नाम से लेकर एड्रेस तक की भारी गलतियां कर दी गईं। इन गलतियों को दुरुस्त करने का काम भी ऑनलाइन किया गया। मगर जिला स्तर पर इन ज्यादातर त्रुटियों को ठीक करने का प्रावधान नहीं किया गया। इस कारण नागरिक पूरे वर्ष सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटते रहे।
समाधान शिविरों में भी कई नागरिकों ने समस्याएं रखीं। कुछ के समाधान हुए तो कुछ की त्रुटियों को ठीक करवाने के लिए चंडीगढ़ मुख्यालय के अधिकारियों को पत्र भेजे गए। चुनाव की घोषणा होने के साथ ही समाधान शिविरों तक भी रोक लग गई।
क्रीड विभाग की आधार मशीनें भी नहीं हुई शुरू
क्रीड विभाग की ओर से लोगों को सुविधा देने के लिए फतेहाबाद नगर परिषद व बीडीपीओ कार्यालय में आधार अपडेट करने व आधार कार्ड की गलतियों को ठीक करने के लिए मशीनें शुरू होनी थीं। लेकिन वो भी अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। नगर परिषद कार्यालय में आधार अपडेट करने वाले सारे उपकरण पहुंचे हुए, लेकिन अभी तक आधार मशीन शुरू नहीं हो पाई।
परिवार पहचान पत्र की योजना तो ठीक है, लेकिन उनमें होने वाली गलतियां बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर कटवाने को मजबूर कर रही हैं। 6 महीने से पीपीपी में हुई गलती को ठीक करवाने के लिए चक्कर काट रहा हूं। समाधान शिविर में भी अधिकारियों के सामने इन समस्या को रखा गया, लेकिन समाधान नहीं हो पाया।
- विकास कुमार, निवासी, फतेहाबाद
हमारे परिवार पहचान पत्र में आय ज्यादा दर्शाई हुई है, अपने आप ही आय ज्यादा दिखाने लगा। पहले 70 हजार आय थी, लेकिन कुछ दिन पहले ही पता चला की पीपीपी में आय ज्यादा हो गई, जब इस बारे में सरकारी कार्यालय में गए तो उन्होंने कोई संतोष जनक जवाब नहीं दिया।
- दीपक, निवासी फतेहाबाद
सिस्टम ऑनलाइन के नाम लोगों को बार बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं। हमने लोगों को इन समस्याओं के लिए घंटों तक लाइन में लगे हुए देखा है। कई बार ओटीपी नहीं आता तो कई बार पीपीपी ने हुई त्रुटि ठीक नहीं होती। अगर सब सिस्टम ऑनलाइन है तो लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर क्यों काटने पड़ते हैं, ये पता नहीं चल पाया है।
- हरदीप सिंह, अध्यक्ष, जिंदगी संस्था
मेरी पीपीपी में आय कम करवानी थी, लेकिन आय कम नहीं हो रही है, जिस कारण मुझे सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। मेरा राशन कार्ड भी कट गया, जिसके लिए कई बार अधिकारियों के पास जा चुका हूं।
- जतिन, निवासी फतेहाबाद।