फतेहाबाद। किसानों और आमजन को सस्ते रेट पर जमीन की निशानदेही की सुविधा देने के लिए सरकार ने तहसील स्तर पर रोवर मशीनें उपलब्ध कराई थीं। इन मशीनों को चलाने के लिए पटवारियों और कानूनगो को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया। इसके बाद राजस्व विभाग के पोर्टल पर आवेदन प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन आमजन को इस बारे में जानकारी ही नहीं है।
तहसील में अब तक सिर्फ एक ही निशानदेही की जा सकी है। सरकार की लाखों रुपये की लागत से खरीदी गई ये आधुनिक मशीनें, जो पारदर्शिता और तेजी लाने के लिए लाई गई थीं, जनता के लाभ के बजाय कानूनगो की अलमारियों तक सीमित रह गई हैं। राजस्व विभाग के अधिकारियों ने माना कि पोर्टल के बारे में आमजन तक जानकारी नहीं पहुंच पाने और जागरूकता की कमी के कारण मशीनों का वास्तविक उपयोग नहीं हो पा रहा है।
क्या थी योजना और क्यों हुई थी शुरू
पुराने समय से चली आ रही जरीब और फीते वाली पैमाइश की प्रक्रिया में अक्सर विवाद की स्थिति बनी रहती थी। पड़ोसी किसानों के बीच खेत की मेढ़ को लेकर होने वाले झगड़ों को खत्म करने के लिए सरकार ने स्टीक पैमाइश का वादा किया था। इसी उद्देश्य के साथ जिले की सभी तहसीलों को जीपीएस आधारित रोवर मशीनें मुहैया कराई गई थीं। दावा था कि इन मशीनों के जरिये एक इंच की भी गड़बड़ी नहीं होगी और घंटों का काम मिनटों में पूरा हो जाएगा।
कानूनगो की अलमारियों में बंद हैं मशीनें
सरकार की ओर से जिले की विभिन्न तहसीलों में करीब 13 रोवर मशीनें दी गई थी। ये मशीनें वर्तमान में फील्ड में होने के बजाय कार्यालयों के कमरों और कानूनगो की अलमारियों में बंद पड़ी हैं। बिना उपयोग के इन मशीनों के सेंसर्स के खराब होने का खतरा रहता है। सरकार की ओर से प्राइवेट लोगों की ओर से निशानदेही को लेकर मनमानी वाली वसूली जाने वाली राशि से छुटकारा दिलवाने के उद्देश्य से इन मशीनों को तहसील स्तर पर दिया गया था, लेकिन प्रशासन की ओर से इसका प्रचार-प्रसार नहीं किया जा रहा है।
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अब तक कितनी निशानदेही हुई है, इस बारे में जानकारी नहीं है। सरकार की ओर से निर्धारित रेट पर निशानदेही के लिए किसान व आमजन राजस्व विभाग के पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं।
- श्याम लाल, जिला राजस्व अधिकारी फतेहाबाद।
लघु सचिवालय परिसर में बने कानूनगो के कक्ष की अलमारी में रखा रोवर मशीन का सामान। संवाद