फतेहाबाद। जन्म से सुनने और बोलने में असमर्थ पांच वर्षीय मनमुल की जिंदगी में अब आवाजों की नई सुबह दस्तक देने वाली है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत उसे कॉक्लियर इंप्लांट के लिए 6.12 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिली है।
गांव खान मोहम्मद निवासी मनमुल को जिला आरंभिक हस्तक्षेप केंद्र में स्क्रीनिंग के बाद कॉक्लियर इंप्लांट के लिए चुना गया। स्वास्थ्य विभाग की ओर से उपचार के लिए 6.12 लाख रुपये की सहायता स्वीकृत की गई है। अब बच्चे का कॉक्लियर इंप्लांट चंडीगढ़ के अस्पताल में कराया जाएगा।
मनमुल जन्म से ही सुन और बोल नहीं पाता है। उसके चाचा जगमाल सिंह ने बताया कि मनमुल के पिता विजय कुमार और मां अनु भी सुनने और बोलने में असमर्थ हैं। ऐसे में बच्चे के उपचार की राह परिवार के लिए बड़ी उम्मीद लेकर आई है।
कॉक्लियर इंप्लांट के बाद मनमुल में सुनने की क्षमता विकसित होने की उम्मीद है। इसके बाद वह धीरे-धीरे बोलना सीख सकेगा। परिवार को उम्मीद है कि उपचार के बाद मनमुल की खामोश दुनिया में आवाजों की गूंज सुनाई देगी और वह सामान्य बच्चों की तरह आगे बढ़ सकेगा।
चेक देने के मौके पर सिविल सर्जन डॉ. बुधराम, एसएमओ डॉ. सुभाष, उप सिविल सर्जन डॉ. लाजवंती गौरी, ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. जयप्रकाश, फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. हिमांशु ठकराल, सुभाष कुमार हित जिला आरंभिक हस्तक्षेप केंद्र का स्टाफ मौजूद रहा।
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स्क्रीनिंग के बाद शुरू हुई उपचार की प्रक्रिया
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिला आरंभिक हस्तक्षेप केंद्र की टीम ने मनमुल की स्क्रीनिंग की थी। जांच के बाद उसे कॉक्लियर इंप्लांट के लिए चयनित किया गया। स्वास्थ्य विभाग की ओर से उपचार के लिए 6.12 लाख रुपये का चेक उपलब्ध कराया गया है। अब चंडीगढ़ के अस्पताल में बच्चे का उपचार किया जाएगा।
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अब छह साल तक के बच्चों को मिलेगा लाभ
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पहले इस योजना के तहत शून्य से दो वर्ष तक की आयु के बच्चों का ही उपचार किया जाता था। अब योजना का दायरा बढ़ाकर शून्य से छह वर्ष तक के बच्चों को इसमें शामिल किया गया है। इससे जन्मजात सुनने की समस्या से जूझ रहे छोटे बच्चों को समय रहते जांच, उपचार और आवश्यक सर्जरी की सुविधा मिल सकेगी।