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Fatehabad News: कवियों ने शब्दों की बौछारों से श्रोताओं को खूब भिगोया

Sun, 01 Mar 2026 11:17 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
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फतेहाबाद। कवि सम्मेलन में मुख्यअतिथि डॉ. ओमप्रकाश कादयान का स्वागत करते सदस्यगणस्त्रोत आयोजक - फोटो : संवाद
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फतेहाबाद। हरियाणा कला-संस्कृति मंच और नीर धरोहर सोसाइटी की ओर से होली के रंग-कवियों के संग कार्यक्रम का आयोजन निजी स्कूल में हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के एमडी, शिक्षाविद् सर्वजीत सिंह मान ने की और प्राचार्य रण सिंह रेपसवाल ने संरक्षण दिया। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. ओमप्रकाश कादयान मुख्य अतिथि रहे।
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इस आयोजन में शामिल कवियों ने होली के रंग, मस्ती और सामाजिक सौहार्द पर आधारित कविताएं सुनाकर श्रोताओं का दिल जीत लिया। डॉ. सुरेश पंचारिया, सुमनलता ‘सुमन’, सन्तोष शीला, देवेंद्र अशंक, सुरेन्द्र जांडली, डॉ. सुदामा शास्त्री, पवन सागर, रणधीर मताना, डॉ. सुमन कादयान, नवल सिंह, राजपाल मिताथल, डॉ. बलराज यथार्थ और हरज्ञान सुथार ने अपनी काव्य रचनाओं से समां बांध दिया।

कार्यक्रम में होली के उल्लास और रंगों की छटा को शब्दों में पिरोकर कवियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। डॉ. सुरेश पंचारिया ने अपने शब्दों की पिचकारी से कहते हुए माहौल को हल्का किया, रंग-बिरंगी उत्सव वाली सबकी होली आई है, मस्ती की पिचकारी लेकर कवियों की टोली आई है।
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कवयित्री सुमनलता ‘सुमन’ ने होली के रंगों की तैयारियों को इस तरह व्यक्त किया, चलो जी चलते हैं बाजार, रंग लेकर आयेंगे चार, गुलाबी, पीला, नीला, लाल, सभी रंगों से मुझको प्यार। वहीं, वरिष्ठ कवि डॉ. सुमन कादयान ने होली की मस्ती को दर्शाते हुए कहा, चलो गली मोहल्ले में फिर से हुड़दंग मचाते हैं, होली पर इस बार तेरी गलियों से होकर जाते हैं।

हिंदी प्रवक्ता संतोष शीला ने फाग के उल्लास को दर्शाते हुए अपनी कविता में लिखा, रंगोत्सव का यह पर्व प्यारा, ढोलक, डफ, मृदंग बजे मंजीरा, गिले-शिकवे सब द्वेष मिटा, फैले चारों तरफ भाईचारा। टोहाना से आए कवि डॉ. नवल सिंह ने होली के रंगों को देशभक्ति से जोड़ते हुए कविता प्रस्तुत की, मीठी बोली, रंग से भरी झोली, निकली मस्तों की टोली, मिटा भेदभाव सब आजादी के मतवालों ने, खून से अपने खेली होली।

रणधीर मताना ने अपनी कविता में कहा, फागुन में रंगों का आया त्योहार, जीवन में आई खुशियों की बहार, और डॉ. सुदामा शास्त्री ने अपनी कविता में आह्वान किया, इन्द्रधनुष के सात रंगों से होली आज मनाएंगे, अपने पराये का भेद सारा हम आज मिटायेंगे। पवन सागर ने अपनी काव्य रचना में लिखा, छिड़े सुरीले गीत रसीले फागण में, आजा ओ मनमीत रसीले फागण में, वहीं, राजपाल मिताथल ने हरियाणवी अंदाज में श्रोताओं को होली के रंगों में भिगो दिया।

डॉ. बलराज यथार्थ और हरज्ञान सुथार ने भी अपनी काव्य रचनाओं से खूब वाहवाही लूटी और कार्यक्रम को सफल बनाया। कार्यक्रम के अंत में सर्वजीत सिंह मान ने होली के रंगों के माध्यम से समाज में भाईचारे, प्रेम और सहयोग को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा, हम सबको अपनी नकारात्मकता को होली की अग्नि में जलाकर सकारात्मक सोच को अपनाना चाहिए।

डॉ. ओमप्रकाश कादयान ने अपने संबोधन में कहा, हमारा जीवन होली के रंगों की तरह उल्लास से भरा होना चाहिए। अगर हम नकारात्मक सोच का परित्याग करके सकारात्मक सोचें तो हमारा जीवन सच में होली के रंगों की तरह खिला-खिला होगा। युवा कवि देवेन्द्र अशंक ने फाग के रंगों को प्रेम के साथ जोड़ते हुए अपनी कविता सुनाई, फाग्गण में रंग बरसे भरतार जल्द आइयो रे, हमरे लिए एक प्रेम का तोफा भी तुम लाइयो रे।
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