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Fatehabad News: उम्मीद की राह...नशामुक्ति की ओर बढ़ते कदम, फतेहाबाद पुलिस ने 2208 नशा पीड़ितों की पहचान की, 20 फीसदी ने छोड़ा नशा

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फतेहाबाद। जिले में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस विभाग ने अब तक 2208 नशा पीड़ित युवाओं की पहचान की है। इनमें से 1501 का उपचार शुरू किया जा चुका है, जबकि 450 नशा पीड़ित उपचार के बाद नशे की लत से पूरी तरह मुक्त हो चुके हैं।
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जिला मुख्यालय पर 10 बेड का नशा मुक्ति केंद्र

जिला मुख्यालय पर 10 बेड का नशा मुक्ति केंद्र है। स्वास्थ्य विभाग ने 10 बेड से ज्यादा मरीजों की भर्ती करने पर रोक लगा रखी है। वजह ये है कि ज्यादा मरीजों होंगे तो देखभाल पर असर पड़ेगा। मेनपावर 10 बेड के हिसाब से ही है। वहीं, 131 केयर टेकर्स नियुक्त किए गए हैं, जो नशाग्रस्त युवाओं की सतत निगरानी एवं व्यक्तिगत देखभाल करते हैं। पीड़ित को मानसिक रूप से सशक्त करने के लिए समुचित परामर्श (काउंसिलिंग) प्रदान किया जाता है। केयर टेकर प्रतिदिन पीड़ित युवाओं से संवाद स्थापित कर उनका मनोबल बढ़ा रहे हैं, ताकि वे नशे को छोड़कर समाज की मुख्य धारा से जुड़े सकें।
उधर, बुधवार को पुलिस लाइन में हुई समीक्षा बैठक में पुलिस अधीक्षक जैन ने कहा कि नशा समाज के लिए गंभीर खतरा बन चुका है और इसे समाप्त करने के लिए प्रशासनिक प्रयासों के साथ-साथ समाज की सक्रिय भागीदारी एवं जनजागरूकता बेहद जरूरी है। बैठक में जन-जागरूकता अभियानों, शैक्षणिक संस्थानों में सेमिनार के आयोजन व पुनर्वास केंद्रों की कार्यप्रणाली को और प्रभावी बनाने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
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एसपी ने निर्देश दिए कि जिले में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर कड़ी नजर रखी जाए और त्वरित, निर्णायक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। बैठक में डीएसपी मुख्यालय एवं क्राइम संजय कुमार, डीएसपी रतिया नरसिंह, प्रवाचक राहुल कुमार, सेना लिपिक संदीप कुमार, 131 केयर टेकर उपस्थित रहे। बता दें कि नशीले पदार्थों के निवारण व युवाओं को नशे से दूर रखने के उद्देश्य से हर वर्ष 26 जून को अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस मनाया जाता है।
नशा मुक्ति केंद्र में वर्ष 2024 में दाखिल मरीजों का ब्योरा
माह ओपीडी दाखिल मरीज
जनवरी 160 14
फरवरी 186 19
मार्च 153 17
अप्रैल 232 20
मई 206 20
जून 174 13
जुलाई 209 24
अगस्त 187 36
सितंबर 228 25
अक्टूबर 144 15
नवंबर 186 21
दिसंबर 166 20
गोलियों का घोल बना लगा रहे इंजेक्शन
नागरिक अस्पताल के मनोचिकित्सक एवं नशा मुक्ति केंद्र के नोडल अधिकारी डॉ. गिरीश का बताया कि नशा मुक्ति केंद्र की ओपीडी में रोजाना 50 से 60 मरीज आ रहे हैं। इसमें सबसे ज्यादा ऐसे मरीज हैं, जो प्रतिबंधित गोलियों का घोल बनाकर सिरिंज के जरिये अपनी नसों में नशा ले रहे हैं।
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