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मरम्मत के नाम पर लूट तो नहीं!

Mon, 16 Nov 2015 12:31 AM IST
फतेहाबाद/ अमर उजाला, ब्यूरो
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 अंबेडकर चौक स्थित लाल बत्ती की मरम्मत के नाम पर फिर से लाखों रुपये का टेंडर नगर परिषद प्रशासन द्वारा आमंत्रित कर दिया गया है।
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पांच साल पहले लगी रेड लाइट की अब तक 7 बार मरम्मत हो चुकी है। आठवीं बार मरम्मत के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। नगर परिषद सूत्रों की मानें तो इस बार रेड लाइट की मरम्मत के लिए लगभग 1 लाख 80 हजार का खर्च बताया जा रहा है।

17 नवंबर को इस प्रोजेक्ट के लिए टेंडर छोड़ा जाएगा। आवेदन आमंत्रित किया जा चुका है। अब तक रेड लाइट की मरम्मत पर तकरीबन 3 से 4 लाख रुपये का खर्च नगर परिषद पहले ही कर चुकी है।
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 हैरत इस बात की है कि रेड लाइट लगवाने की कुल लागत महज 6-7 लाख रुपये ही आई थी जिसकी पुष्टि नगर परिषद ईओ ओपी सिहाग एवं पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष वीरेंद्र नारंग भी करते हैं।
नया सेटअप ना लगवाने के चलते घोटाले की आशंका
हैरत की बात है कि रेड लाइट सेटअप की मरम्मत के नाम पर बार-बार क्यों खर्चा किया जा रहा है। जबकि मरम्मत के बाद एक बार भी रेड लाइट लंबे समय तक लगातार चालू हालत में नहीं रही।

सवाल इस बात को लेकर भी हैं कि नगर परिषद प्रशासन आखिरकार नया सेटअप लगाने की बजाए बार-बार लाखों रुपये
 पुरानी रेड लाइट को ठीक करने पर ही क्यों जोर दे रहा है। यही बात इस सारे मामले को संदेहास्पद बना रही है।

नया रेड लाइट सेटअप लगाने में लगभग 7 से 8 लाख रुपये का खर्च आता है जबकि फतेहाबाद में पिछले पांच साल में 7 बार रेड लाइट की मरम्मत के नाम पर नगर परिषद की ओर से लगभग साढ़े 3 से 4 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

अब आठवीं बार मरम्मत के नाम पर फिर से 1 लाख 80 हजार का खर्च बताया जा रहा है। अफसर भी इस मामले में खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। नप ईओ ने भी पुरानी लाइट को ही ठीक कराना बेहतर आप्शन बताया है।

 लेकिन जब मरम्मत के खर्च पर नया लाइट सेटअप आता है तो उसे अपनाया क्यों नहीं जा रहा। ये अपने आप में एक सवाल है जिसका जवाब शहर की जनता जरूर जानना चाहेगी।

पिछले एक साल से बंद है शहर की इकलौती रेड लाइट
फतेहाबाद शहर में जब अंबेडकर चौक पर रेड लाइट लगाई गई तो शहर के हरेक बाशिंदे ने इसका स्वागत किया था। शहरवासियों ने इसे शहर के विकास के साथ जोड़कर देखा था। क्योंकि फतेहाबाद ही नहीं, पूरे जिले में लगी ये पहली रेड लाइट थी। रतिया-टोहाना में आज भी कोई रेड लाइट नहीं है।

ये रेड लाइट इतनी लोकप्रिय हुई कि अंबेडकर चौक की जगह लोग इसे रेड लाइट चौक बुलाने लगे हैं। लेकिन कभी हादसों के चलते तो कभी कर्मचारियों की लापरवाही के चलते रेड लाइट लगातार जलती-बुझती रही।

 कई बार इसको ठीक करने के लिए कोशिशें की गई, लेकिन हरेक बार कभी एक हफ्ता तो कभी एक माह तक ये लाइट चलती, फिर किसी ना किसी वजह से बंद हो जाती थी।

एक ही लाइट, इसलिए इंजीनियर करते हैं आनाकानी
अंबेडकर चौक में लगी रेड लाइट को ठीक करने के लिए नगर परिषद की ओर से विशेष तौर पर गुड़गांव से इंजीनियर बुलाए जाते हैं। उनके रहने-खाने की व्यवस्था भी नगर परिषद की ओर से की जाती है। चूंकि फतेहाबाद में महज एक ही ट्रैफिक सिग्नल है तो कंपनी भी एक ट्रैफिक लाइट को ठीक करने के लिए विशेष तौर पर कर्मचारी भेजने में आनाकानी करती है।
बीघड़ रोड पर ट्रैफिक लाइट का प्रोजेक्ट हो चुका है रद्द
शहर भर में अंबेडकर चौक की रेड लाइट को मिली प्रशंसा के बाद नगर परिषद अधिकारियों ने बीघड़ मोड़ पर भी रेड लाइट लगाने की घोषणा की थी लेकिन बाद में इसे नॉन फिजीबल बताकर इस प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया गया था।
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अधिकारियों का तर्क था कि बीघड़ रोड और शिव चौक की सड़क सिंगल रोड है, ऐसे में यहां पर वाहनों का देर तक रुकना ट्रैफिक व्यवस्था को और बिगाड़ सकता है। इसके बाद ही बीघड़ मोड़ पर ट्रैफिक लाइट का प्रोजेक्ट कैंसिल किया गया था।
यह बोले अफसर

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