जी हां, फतेहाबाद जिले में बाल विवाह की कुप्रथा के पीछे सबसे बड़ा कारण है नाबालिग लड़कियों से बलात्कार और छेड़छाड़ की बढ़ती घटनाएं। बाल विवाह निषेध कार्यालय के आंकड़े तो यही कह रहे हैं।
इसकी पुष्टि खुद जिला बाल विवाह निषेध अधिकारी रेखा अग्रवाल भी करती हैं। उनकी मानें तो बलात्कार या छेड़छाड़ की शिकार हुई नाबालिग लड़कियों के माता-पिता बदनामी के डर के चलते कम उम्र में ही बेटियों का विवाह करने जैसा फैसला ले लेते हैं। जिसका खामियाजा लड़की को शारीरिक परेशानियां झेलकर उठाना पड़ता है।
पिछले दो सालों में 33 बाल विवाह रुकवाए
जिला बाल विवाह निषेध अधिकारी कार्यालय की मानें तो पिछले दो सालों में विभाग ने 33 बाल विवाह रुकवाए हैं। आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2014 से लेकर मार्च 2015 तक विभाग को कुल 14 शिकायतें मिलीं जिसमें उन्होंने 19 बाल विवाह को रुकवाया।
इसमें 4 बाल विवाह कोर्ट के आदेशों की सहायता से रुकवाए गए तो 11 बाल विवाह को माता-पिता की काउंसलिंग कर उनकी सहमति से रुकवाया गया। एक केस में आरोपी माता-पिता के खिलाफ एफआईआर तक करवानी पड़ी।
एक मामले में झूठी शिकायत मिली तो दो केस अदालत में विचाराधीन हैं। इसी तरह अप्रैल 2015 से लेकर अब तक विभाग ने 11 शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए 14 बच्चों की शादियां रुकवाई हैं।
जिसमें 2 कोर्ट ऑर्डर से, 7 काउंसलिंग और 3 पुलिस केस के जरिए रुकवानी पड़ी हैं। बाकी केस नलटी में डाले गए हैं।
जिला बाल विवाह निषेध अधिकारी रेखा अग्रवाल की मानें तो पिछले दो सालों में लगभग 75 फीसदी मामलों में बाल विवाह का शिकार होने वाली बच्ची रेप अथवा छेड़छाड़ की शिकार निकली है।
गरीबी और अज्ञानता नहीं हैं बड़े कारण
जिला बाल विवाह निषेध अधिकारी रेखा अग्रवाल के अनुसार पुराने समय में ऐसा होता था कि पिता अपनी गरीबी के चलते जल्द से जल्द बेटी का ब्याह कर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त होने की सोचते थे या फिर अज्ञानता के चलते बाल विवाह कर दिया करते थे।
लेकिन अब ऐसा नहीं है। रेखा अग्रवाल बताती हैं कि अब माता-पिता को पता होता है कि 18 साल से कम उम्र की लड़की का विवाह करना कानूनन जुर्म है। लेकिन वो बदनामी से बचने के लिए ऐसा कदम उठा लेते हैं।
इसके अलावा उनकी तफतीशों में ये बात भी निकल कर आई है कुछ अभिभावक अपनी बेटियों के प्यार-मोहब्बत में पड़ने की आशंका से बचने के लिए भी छोटी उम्र में ही उनके विवाह के बारे में सोचते हैं।
बाल विवाह के संरक्षक को हो सकती है 2 साल की सजा
बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के तहत बाल विवाह करवाने वाले माता-पिता या संरक्षक के खिलाफ पुलिस केस किया जा सकता है। अदालत में दोषी पाए जाने पर माता-पिता अथवा संरक्षक को दो साल की कैद और एक लाख जुर्माना हो सकता है।
बाल विवाह से लड़कियों को होती है मानसिक व शारीरिक परेशानी : डा. बंसल
स्वास्थ्य विभाग की डिप्टी सिविल सर्जन डा. सुजाता बंसल की मानें तो नाबालिग लड़की का शरीर विवाह के लायक ही नहीं होता। डा. बंसल के अनुसार नाबालिग लड़की के हार्मोन पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते हैं।
जिसके कारण उनका शरीर न तो गर्भ धारण की स्थिति में होता है और न ही गृहस्थ जीवन की जिम्मेदारियों को उठाने के। ऐसी स्थिति में लड़कियों को मानसिक और शारीरिक परेशानी होती है। इसलिए बेटियों की शादी आवश्यक आयु पूरी होने के बाद ही करनी चाहिए।
शादी रुकवाकर खुशी नहीं होती लेकिन कानूनन है गलत
किसी की शादी रुकवा कर हमें खुशी नहीं मिलती, लेकिन कानूनन ये गलत है और हमारा काम कानून की पालना करवाना है। वैसे भी बाल विवाह से बेटियों की जिंदगी तबाह ही होती है।
अभिभावकों को इससे बचना ही चाहिए।
रेखा अग्रवाल, जिला बाल विवाह निषेध अधिकारी, फतेहाबाद।