फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तीन अध्यादेशों के खिलाफ जिलेभर के आढ़तियों ने की हड़ताल

विज्ञापन
विज्ञापन
केंद्र सरकार द्वारा लाए तीन अध्यादेशों के खिलाफ किसानों व आढ़तियों ने मोर्चा सा खोल दिया है। व्यापारी और किसान संगठन दोनों ही इसे अपने हितों के खिलाफ बता रहे हैं। व्यापारी 4 दिनों से जिले की अनाज मंडियों में अपना कारोबार ठप रख अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए है जबकि किसान संगठनों ने भी अलग से धरना लगा रखा है। इससे पूर्व व्यापारी व किसान संगठन संयुक्त रुप से करीब 6 बार धरना प्रदर्शन कर राष्ट्रपति के नाम उपायुक्त को ज्ञापन सौंप चुके हैं। फतेहाबाद, टोहाना, भट्टू कलां, भूना के आढ़तियों ने अनाज मंडी में जबकि किसानों ने ढ़ाणी गोपाल के चौक पर धरना लगाया हुआ है। सभी धरनारत किसान अध्यादेश का विरोध कर रहे हैं। फतेहाबाद की अनाज मंडी में व्यापारियों का धरना प्रदर्शन शनिवार को भी जारी रहा। व्यापारियों ने मंडी बंद रखते हुए मंडी में एकत्रित होकर अध्यादेशों के विरोध में नरमे की फसल जलाकर तथा केंद्र सरकार व राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। व्यापारियों ने कहा कि सरकार द्वारा जो नए तीन अध्यादेश जारी किए है इससे किसान व व्यापारियों को नुकसान होगा। केंद्र सरकार ने बड़ी-बड़ी कंपनियों के मालिक को लाभ पहुंचाने के लिए यह नए अध्यादेश लाए है। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में होने वाले किसानों की रैली को भी व्यापार मंडल अनाज मंडी फतेहाबाद का पूर्ण समर्थन रहेगा तथा समर्थन स्वरूप कर भी मंडी बंद रखी जाएगी। इस धरना प्रदर्शन में व्यापार मंडल के अन्य पदाधिकारियों व किसान नेताओं ने संबोधित किया। इसी तरह टोहाना, भट्टू कलां, भूना की अनाज मंडी में व ढाणी गोपाल चौक पर धरने पर बैठे किसान सरकार को कोस रहे हैं।
विज्ञापन

आढ़तियों को इन बातों पर ऐतराज
अध्यादेश में यह प्रावधान है कि कोई भी पैन कार्ड होल्डर किसान की फसल खरीद सकता है जिस पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। खरीददार किसान को तीन दिन में फसल की राशि नहीं देता तो किसान एसडीएम के पास जा सकता है। एसडीएम एक माह तक इस पर फैसला दे सकता है। अगर फैसला किसान के खिलाफ आता है तो वह डीसी के पास अपील कर सकता है। यहां फैसला किसान के खिलाफ आता है तो किसान किसी भी कोर्ट में अपनी राशि के बारे में दावा नहीं कर सकेगा। इसके अलावा अध्यादेश में एमएसपी का कोई जीकर नहीं हैं। सरकार बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए आढ़तियों को बिचौलियां बोल रही है जबकि नए अध्यादेश में यह प्रावधान है कि खरीददार पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। ऐसे में आढ़ती का धंधा तो चौपट होगा ही साथ में मार्केट कमेटी की मार्केट फीस व कृषि उपकर खत्म हो जाएगा। ऐसे में मार्केट कमेटी गांवों में विकास कार्य नहीं करवा पाएगी।
व्यापार मंडल के प्रवक्ता गुरदीप सिंह अमृतसरिया ने कहा कि सरकार बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए आढ़त का धंधा चौपट करना चाहती है। इसके अलावा किसानों का शोषण करना चाहती है। उन्होंने उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के बारे में कहा कि अगर वह चौधरी देवीलाल के असली उत्तराधिकारी है तो सरकार से समर्थन वापिस ले। नहीं तो इनकी राजनीतिक मौत होना स्वाभाविक है। गुरदीप सिंह ने कहा कि दुष्यंत ने किसानों के वोट लेकर उनके साथ धोखा किया है। अगर वह किसानों के लिए कुर्बानी देेते हैं तो राजनीतिक पारी खेल सकते हैं अन्यथा इन्हें घर बैठना होगा।
विज्ञापन

अनाज मंडी के प्रधान सुभाष मुंजाल ने कहा कि सरकार कहती है कि समर्थन मूल्य पर फसल बिकेगी। उन्होंने सवाल किया है कि जब मंडी ही नहीं रहेगी तो समर्थन मूल्य पर कहा बिकेगी। उन्होंने का कि मंडी में 250 दुकानें हैं। हर दुकान के पीछे 15 से 20 लोगों को रोजगार मिला हुआ है। मंडी बंद होने के बाद हजारों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। यहां छोटे जमींदार है जिनकी फसल निकलती है और साथ-साथ के मंडियों में बिकती है। ऐसे में वह दूर-दराज से कैसे फसल बेच पाएंगे। यह असंभव है।
भाजपा नेता एवं पूर्व विधायक बलवान दौलतपुरिया ने कहा कि उन्होंने सीएम को पत्र लिखकर अवगत करवाया है कि किसानों व आढ़तियों के मन में पैदा हो रही भ्रांतियों को दूर किया जाए। अगर एमएसपी खत्म होता है तो मंडीकरण व व्यवसाय खत्म हो जाएगा। किसानों को औने-पौने दामों पर फसल बेचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। दौलतपुरिया ने कहा कि प्रदेश में 72 फीसदी किसान 10 एकड़ से नीचे वाले हैं। यह किसान बाहर जाकर फसल नहीं बेच सकते। सरकार समर्थन मूल्य का एलान करे तो इनका संदेह खत्म हो जाएगा। पूर्व विधायक ने कहा कि वह दलगत राजनीति से ऊपर उठकर मांग करते हैं कि सीएम हस्तक्षेप करके प्रदेशभर के धरने खत्म करवाए। क्योंकि आज कि सान का धान, नरमा, मूंगफली, मक्का व बाजरे का सीजन है ऐसे में वह धरने पर नहीं बैठक सकते। उन्होंने मांग कि है कि सरकार चौथा अध्यादेश लाए जिसमें यह सुनिश्चित हो कि सरकार प्रत्येक फसल को एमएसपी पर खरीदेगी। उससे ऊपर कोई खरीदे लेकिन कम कोई ना खरीद पाए।
कांग्रेस नेता व पूर्व विधायक प्रहलाद सिंह ने कहा कि सरकार मल्टी नेशनल कंपनियों को बढ़ावा देना चाहती है। उन्होंने कहा कि अब तो लाइसेंसशुदा आढ़ती ही फसल की खरीद कर सकते हैं। साथ में लॉकर होने के साथ किसानों के साथ भाईचारा भी है। ऐसे में किसान की फसल और आढ़ती के पैसे दोनों ही सुरक्षित रहते हैं। उन्होंने हैरानी जताई कि अब एक पैन कार्ड धारक चाहे वह कहीं का भी हो फसल खरीदकर यहां से जा सकता है। किसान अपनी वसूली के लिए कोर्ट भी नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकार को तुरंत यह कदम वापस लेना चाहिए।
गांव नागपुर के प्रगतिशील किसान व कृषि विशेषज्ञ अरुण ग्रोवर ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से पारित अध्यादेशों में कई खामियां है। 80 फीसदी किसान छोटे व सीमांत वर्ग से जो दूर-दराज की मंडियों में अपनी उपज बेचने में सक्षम नहीं है। इन अध्यादेशों से मंडी एक्ट कमजोर हो जाएगा। इसके कमजोर होने से प्रदेश सरकार का मंडी से बाहर किसान की उपज की खरीद पर नियंत्रण खत्म हो जाएगा। उसके बाद व्यापारी किसान की उपज को एमसपी पर खरीदने के बाध्य नहीं होंगे। जबकि इसके नीचे के भाव पर खरीद के लिए स्वतंत्र कर दिए जाएंगे।
गांव दादूपूर के प्रगतिशील किसान व कृषि विशेषज्ञ सुधीर मेहता के अनुसार, मान ले कि यह अध्यादेश किसानों व आढ़तियों के हित में है लेकिन सरकार इसके पक्ष में सेमिनार, विज्ञापन या सम्मेलन करके भ्रम दूर क्यों नहीं करती। मेहता ने कहा कि इन अध्यादेशों के लागू होने से कॉर्पोरेट जगत व व्यापारी वर्ग मनचाहे ढंग से फसल का भंडारण करके मुनाफाखोरी व कालाबाजारी करने को स्वतंत्र हो जाएंगे। आम उपभोक्ता महंगाई की मार में पीसता रहेगा। उन्होंने कहा कि तीनों अध्यादेशों में एमएसपी का कहीं भी जिक्र तक नहीं है, लेकिन सीएम, पीएम मौखिक रुप से किसानों को इसका प्रलोभन दे रहे है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें