वाहिद संधर शुगर मिल के मालिकों द्वारा पुरानी मशीनों को उखाड़ कर ले जाने पर किसान संघर्ष समिति के नेतृत्व में किसानों ने शनिवार को विरोध प्रदर्शन किया। किसानों के बिना अनुमति के मिल में प्रवेश करने पर सिक्योरिटी गार्ड के साथ बहसबाजी भी हुई, हालांकि पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को काबू कर लिया। किसानों ने सरकार और मिल मालिकों के खिलाफ नारेबाजी करके डीसी फतेहाबाद के नाम नायब तहसीलदार के माध्यम से ज्ञापन भी सौंपा।
किसान संघर्ष समिति के जिला अध्यक्ष ओम प्रकाश मंडा व मिल बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक चांदी राम ने बताया कि प्राइवेट मिल मालिक रातोंरात भूना शुगर मिल की मशीनरी एवं पुर्जे उखाड़ कर पंजाब लेकर जा रहे थे। मिल में कई मशीनों को गैस कटर से काटा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला की एकमात्र औद्योगिक इकाई को बर्बाद करके बड़ा षड्यंत्र रचा जा रहा है, जिसको किसान संघर्ष समिति कभी सफल नहीं होने देगी। इस मौके पर इनेलो के जिलाध्यक्ष बलविंद्र सिंह कैरो, कर्मचारी नेता कृष्ण कुमार धारणिया, महेंद्र सिंह जांड़ली, धर्मपाल राव, करनैल सिंह कुलां, मास्टर राजकुमार शर्मा, कृष्ण कुमार गोदारा, रामनिवास भांभू, बलवीर सिंह दहिया, साधु राम, साहब राम खिलेरी आदि मौजूद रहे।
1989 में देवीलाल ने किया था मिल का शुभारंभ, 2009 में हो गई बंद
हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी देवीलाल ने 12 मार्च 1989 को सहकारी चीनी मिल भूना का विधिवत रूप से शुभारंभ किया था। मिल शुरुआती दौर से ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई थी। मिल की बर्बादी के लिए कुछ अधिकारी व कर्मचारियों की भी भूमिका रही थी। जो गन्ना उत्तर प्रदेश से कौड़ियों के भाव खरीद कर यहां दिखाया जाता था। उपरोक्त गन्ना सूखा होता था तथा उसमें रस नाम की कोई चीज नहीं होती थी, जिसके कारण लगातार मिल कर्ज के बोझ के नीचे दबती गई और 20 करोड़ का कर्ज होने के कारण कांग्रेस की सरकार ने 2006 में मिल को करीब 43 करोड़ रुपये में पंजाब के फगवाड़ा वाहिद संधर फर्म को सौंप दी थी। सरकार से हुए समझौते के तहत मिल को उसके उक्त फर्म को चलाना था जिसकी पहले से ही फगवाड़ा में एक शुगर मिल चल रही है। वाहिद संधर फर्म ने मिल को सिर्फ तीन साल चलाया। 2008 में उत्तर प्रदेश की फर्म को चलाने के लिए दे दी। मिल उसके बाद एक साल चली और 2009 में बंद हो गई थी। मिल को चलाए जाने की मांग को लेकर लंबे समय तक आंदोलन भी हुए थे। परंतु सरकार पर कोई असर नहीं हुआ। जनवरी 2020 में प्रदेश सरकार के आदेश पर 156 एकड़ 7 कनाल जमीन का मालिकाना हक राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है। इसलिए अब शुगर मिल की पुरानी मशीनों को उखाड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है, जिसका समिति विरोध कर रही है।
14 सितंबर को डीसी को देंगे ज्ञापन
मिल बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक चांदी राम ने बताया कि प्राइवेट मिल मालिक मशीनों व पुर्जों को निकाल कर ले जा रहे हैं, जिसके खिलाफ प्रदर्शन किया गया। अब 14 सितंबर को डीसी को ज्ञापन दिया जाएगा। प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई तो 17 सितंबर को इलाका के किसानों को एकत्रित करके आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी। इस संबंध में नायब तहसीलदार राजेश कुमार व थाना प्रभारी कपिल कुमार सिहाग ने बताया है कि संघर्ष समिति के आग्रह पर मिल मालिकों को पुरानी मशीनों के उखाड़ने के कार्य को बंद करवा दिया है।