फतेहाबाद। वीरवार को एजेंसी का ठेका समाप्त होने के बाद शुक्रवार को आधे शहर की सफाई व्यवस्था बिगड़ गई। ठेका खत्म होते ही एजेंसी कर्मचारियों ने सफाई कार्य रोक दिया। हालात तब और खराब हो गए, जब नगर परिषद के स्थाई तथा पालिका रोल पर तैनात कर्मचारियों ने भी एजेंसी के निर्धारित क्षेत्रों में सफाई करने से इन्कार कर दिया। इससे कई जगह कचरे के ढेर लग गए। इस कारण आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ा।
वहीं एजेंसी के कर्मचारी ठेका बढ़ाने की मांग को लेकर नगर परिषद कार्यालय में धरने पर बैठ गए। धरने का नगर पालिका कर्मचारी संघ ने भी समर्थन किया और इसमें पार्षद भी शामिल हुए। धरने की सूचना के बाद नगर परिषद अधिकारियों ने एजेंसी का सफाई का एक माह का ठेका बढ़ाने के मौखिक आदेश देते हुए काम शुरू करने के निर्देश दिए।
अधिकारियों की तरफ से मौखिक आदेश जारी होने के बाद कर्मचारियों ने धरना खत्म कर दिया। अब सोमवार को नगर परिषद प्रशासन के अधिकारी चौथी बार ठेका बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार करेंगे और डीएमसी अनुराग ढालिया को भेजेंगे। नगर परिषद में 28 स्थायी और 108 पालिका रोल पर कर्मचारी तैनात हैं।
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सवाल ये कि नगर परिषद ने नया टेंडर क्यों नहीं लगाया
नगर परिषद ने पिछले साल सितंबर माह में सनराइज एजेंसी को सफाई का ठेका दिया था। एजेंसी को लालबत्ती चौक से भट्टू रोड, बीघड़ रोड क्षेत्र का सफाई ठेका दिया हुआ है। इसमें वार्ड 11 से 21 और 24 शामिल हैं। इस साल सितंबर माह में एजेंसी का सफाई का ठेका खत्म हो गया था। नगर परिषद ने नए ठेके के बारे में प्रक्रिया ही शुरू नहीं की। तीन माह से इसी ठेके को बढ़ाया जा रहा है जबकि हर माह एजेंसी के खिलाफ सफाई न करने को लेकर शिकायतें आ रही हैं।
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70 कर्मचारियों पर असर
नगरपालिका कर्मचारी संघ के राज्य उपाध्यक्ष रमेश तुषामड़ ने कहा कि नगर परिषद को पहले वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए लेकिन नहीं की गई है। 70 से अधिक सफाई कर्मचारियों को हटाए जाने के बाद शहर में सफाई व्यवस्था भी चरमरा गई। नगर परिषद परिसर में धरने पर बैठे कर्मचारी सन्नी आदिवाल, सुनील पुआल, नरेन्द्र कुमार, बलजीत सिंह, अमित घोघलिया, रीना रत्ति, गंगा देवी आदि ने कहा कि नगर परिषद ने सनराइज कंपनी को शहर में सफाई का ठेका दिया था। समय पर ठेका न बढ़ाने से परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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सफाई ठेके को एक माह के लिए आगे बढ़ाया जा रहा है और इस दौरान टेंडर प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाएगा। दूसरा जो कर्मचारी धरना दे रहे थे वह नगर परिषद के नहीं है बल्कि ठेकेदार के हैं।
- सुरेश चौहान, कार्यकारी अधिकारी (ईओ), नगर परिषद।