सामुदायिक केंद्र की खस्ता हालत।
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खंडहर में तब्दील हो रहे करोड़ों की लागत से तैयार सामुदायिक केंद्र की हालत सुधरने की आस जगी है। समस्या को लेकर अमर उजाला के 17 सितंबर की अंक में समाचार प्रकाशित होने के बाद ईओ ऋषिकेश वर्मा ने सामुदायिक केंद्र के हालात का जायजा लिया। उन्होंने अच्छी खासी इमारत ही खस्ता हालत देखकर चिंता जताई है। उन्होंने नगर परिषद अधिकारियों से कहा है कि सामुदायिक केंद्र का सदुपयोग किया जाना चाहिए।
ईओ ने कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि सामुदायिक केंद्र की जल्द सफाई की जाए। इसके बाद इस भवन को या तो ठेके पर दिया जाएगा, अन्यथा नगर परिषद प्रशासन अपने स्तर पर किराये पर देना सुनिश्चित करेगा ताकि शहरवासी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में विवाह व अन्य समारोह आयोजित कर सकें। इससे नगर परिषद की भी आय बढ़ेगी। सामुदायिक केंद्र की इमारत महज 6 साल पुरानी है। यह केंद्र करीब तीन साल से बंद ही पड़ा है। गेट को ताला लगा हुआ है। अंदर कबूतरों ने डेरा जमाया हुआ है। कमरों व शौचालय की भी हालत भी खराब हो गई हैं। दीवारें जर्जर हो चुकी हैं। प्रांगण की हरियाली अब खरपतवार में बदल चुकी है।
नगर परिषद को नहीं हो रही आय
सामुदायिक केंद्र नगर परिषद की आय बढ़ाने वाली संपत्ति है। यह केंद्र करीब तीन एकड़ में फैला हुआ है। नगर परिषद प्रशासन ने महसूस किया कि शहर में एक ऐसा भवन होना चाहिए, जिसमें शहर के लोग शादी व अन्य समारोह कर सकें और नगर परिषद को भी आमदन होती रहेगी। इसके चलते वर्ष 2014 में इसका निर्माण किया था। कुछ महीनों बाद नगर परिषद ने शहर की एक फर्म को इसे ठेके पर दिया। ठेका तीन साल के लिए करीब 30 लाख रुपये में दिया गया। ठेकेदार ने कुछ रुपये तो उसकी समय दे दिए गए, बाकी रुपयों की किश्त के रूप में देना तय हुआ, हालांकि बाद ठेकेदार को बचत नहीं हुई। इस कारण वह नगर परिषद को बिना बताए ही सामुदायिक केंद्र छोड़कर चला गया। फिलहाल न तो नगर परिषद को कोई आय हो रही है और न ही ठेकेदार से बकाया राशि वसूल हो पाई है।
कोट
सामुदायिक केंद्र की हालत सुधारी जाएगी : ईओ
मैंने सामुदायिक केंद्र का जायजा लिया है। इसकी जल्द ही सफाई करवाई जाएगी। इसके अलावा इस भवन का फायदा लिया जा सके, इसके लिए भी अनिवार्य कदम उठाए जाएंगे। इसकी साफ सफाई कर इसे इस्तेमाल योग्य बनाया जाएगा। इसके बाद ठेके पर देने की प्रक्रिया दोबारा शुरू की जाएगी ताकि नगर परिषद को आय हो सके।
-ऋषिकेश वर्मा, ईओ, नगर परिषद।