फतेहाबाद। धान की कटाई के समय पराली जलाने को लेकर प्रशासन का रवैया ढुलमुल रहा और अब जब गेहूं की बिजाई चल रही है, तो किसान प्रशासन के रोके नहीं रुक रहे हैं। जिले में पिछले दो माह में पराली जलाने के अब तक 461 मामले सामने आ चुके हैं। जबकि पिछले साल इसी दिन 679 लोकेशन आई थी। हालांकि पिछले साल की अपेक्षा इस साल लोकेशन कम हैं, लेकिन अगर नवंबर के पखवाड़े की बात की जाए तो सिर्फ एक दिन ही एक्यूआई 400 से कम रहा था, इसके बाद तो लगातार एक्यूआई का स्तर 400 के पार चल रहा है।
फतेहाबाद में बुधवार को भी हरसेक की रिकॉर्ड तोड़ लोकेशन आई है। हरसेक ने कृषि विभाग को 36 फायर लोकेशन भेजी। वहीं जिले में शाम होते की आसमान में धुएं की चादर बिछ गई। फतेहाबाद में अब तक पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर उन पर जुर्माने ही ठोक रही है। अब तक 239 किसानों को छह लाख 61 हजार रुपये का जुर्माना ठोका जा चुका है। वहीं बुधवार को एक्यूआई का स्तर पर 352 रहा। फतेहाबाद में सबसे अधिक पराली टोहाना, रतिया, जाखल व भूना क्षेत्र में जलाई गई है।
सुप्रीम कोर्ट के फटकार के बाद एक्शन में आया प्रशासन
दो माह पहले से ही किसान पराली जलाने लगे थे। उस समय कृषि विभाग केवल किसानों के चालान काटने में लगा रहा। अक्तूबर के अंत तक आते-आते तो किसानों ने गेहूं बिजाई के चक्कर में पराली को पुरजोर से जलाना आरंभ कर दिया। पहले कृषि विभाग ढीला दिखाई दिया और प्रशासन ने भी कोई कड़े प्रयास नहीं किए, लेकिन अब जब सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषित राज्यों को फटकार लगाई है तो पूरा प्रशासनिक अमला व पुलिस भी फील्ड में उतर गई। अभी तक किसी भी किसान पर पराली जलाने के मामले में केस दर्ज नहीं किया गया है। हालांकि उपायुक्त ने मंगलवार को हुई बैठक में अधिकारियों को साफ कहा है कि अगर कोई किसान पराली जलाता है, तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाए।
क्यों जला रहे हैं पराली
किसानों द्वारा पराली जलाने के तीन कारण हैं। पहला जब फसल कटाई शुरू हुई तो प्रशासन किसानों को समय पर बेलर उपलब्ध नहीं करवा पाया। यहां से कई बेलर संचालक दूसरे जिलों में गए हुए थे, जिनको बाद में कारण बताओ नोटिस भी दिया गया था। फतेहाबाद से 60 बेलर संचालक फतेहाबाद में फसल कटाई के दौरान जिले से बाहर थे। दूसरा कई किसान ऐसे भी थे, जो पराली प्रबंधन की ओर बढ़ना ही नहीं चाहते थे, कई किसानों ने तो बेलर से पराली की गांठें बनवाने के बाद भी उनको आग लगा दी थी। तीसरा गेहूं बिजाई का समय 25 अक्तूबर से 15 नवंबर तक था। गेहूं बिजाई के चक्कर में किसानों ने इस अवधि के दौरान ही सबसे अधिक पराली जलाई है।
-किसानों को जागरूक किया जा रहा है और जो किसान पराली जला रहे हैं, कृषि विभाग उनके खिलाफ जुर्माना भी किया जा रहा है। अब पुलिस के साथ भी अधिकारी खेतों में जल रही पराली को बुझवाकर किसानों को पराली प्रबंधन के लिए जागरूक कर रहे हैं। अभी तक किसी भी किसान पर केस दर्ज नहीं हुआ है।
-डॉ. राकेश सिहाग, डीडीए, फतेहाबाद।