फतेहाबाद। शहर में करीब 400 से 500 लावारिस पशु सड़क पर घूम रहे हैं। इनसे हमेशा हादसे का खतरा बना रहता है। वहीं नगर परिषद की ओर से लावारिस पशुओं को पकड़ने का टेंडर एक बार फिर अटक गया है। टेंडर को लेकर अधिकारियों और प्रधान के बीच खींचतान भी शुरू हो गई है। नगर परिषद प्रधान ने टेंडर को खोलने की अनुमति नहीं दी है बल्कि अधिकारियों से टेंडर लगाने पर जवाब तलब किया है। प्रधान का कहना है कि रुपये की बर्बादी के लिए टेंडर लगाया जा रहा है जबकि संसाधन नप के पास हैं और गोशाला को रुपये भी हर माह दे रहे हैं। इधर, अधिकारियों का कहना है कि एडीसी कार्यालय के आदेश पर टेंडर लगाया गया था।
फिलहाल टेंडर न खोला गया है और न ही रद किया गया है। नगर परिषद ने बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए टेंडर जारी किया था। 24 को टेंडर खुलना था लेकिन अधिकारी न होने के कारण नहीं खोला गया। मंगलवार को सफाई ब्रांच ने ईओ जितेंद्र से अनुमति लेकर जब टेंडर के दस्तावेज प्रधान नगर परिषद के पास भेजे तो उन्होंने अनुमति देने से इन्कार कर दिया। प्रधान ने अधिकारियों से जवाब मांगा कि मेरी अनुमति के बिना कैसे टेंडर लगाया गया है।
तीन बार टेंडर लगा प्रधान को पता नहीं
नगर परिषद बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए तीन बार टेंडर लगा चुकी है। पहली बार एक फर्म आने के कारण रद कर दिया गया। दूसरी बार भी एक ही एजेंसी ने आवेदन किया और फिर रद कर दिया गया। तीसरी बार नप ने टेंडर लगाया फिर एक ही एजेंसी ने आवेदन किया। नप को अधिकार है कि तीसरी बार फर्म नहीं आती है तो वह टेंडर खोल सकती है। अहम बात यह है कि तीन बार टेंडर जारी हुआ लेकिन प्रधान को पता ही नहीं है।
ये थी शर्त :
नगर परिषद ने टेंडर में शर्त लगाई थी कि पशुओं को पकडने पर उसकी टेंगिंग करनी होगी। अगर वह पशु दोबारा शहर में मिलते हैं तो पहली बार मिलने पर 51 सौ रुपये तथा दूसरी बार पकड़े जाने पर 11 हजार रुपये जुर्माना होगा। छोटा पशु बछिया पकडने पर 100 रुपये और गाय और नंदी पकड़ने पर 300 रुपये का नप भुगतान करेगी।
नगर परिषद प्रधान से सीधी बात
सवाल : पशुओं को पकड़ने का टेंडर लगाया था क्या रहा।
जवाब : कोई एजेंसी नहीं आई है।
सवाल : एजेंसी तो आई है तीन बार लग चुका है टेंडर
जवाब : टेंडर हमने क्यों लगाया, मैंने अधिकारियों से पूछा है।
सवाल : टेंडर तो लग चुका है और क्यों नहीं लगना चाहिए।
जवाब : हमारे पास ट्रैक्टर और कर्मचारी हैं, हम गोशाला को सवा लाख रुपये भी दे रहे हैं। किसी कीमत पर टेंडर नहीं खोलने दूंगा।
सवाल : गोशाला वाले पशु नहीं पकड़ रहे, रात को हालात खराब होते हैं।
जवाब : मैंने आदेश कर दिए हैं
सवाल : आदेश पहले भी दिए गए न नप ने पकड़े हैं और न गोशाला ने
जवाब : मैंने अब सख्ती कर दी है, गोशाला पकड़ेगी
सवाल : क्या अब टेंडर नहीं खुलेगा और नहीं लगेगा दोबारा
जवाब : नहीं खुलेगा टेंडर किस लिए खोला जाए।
जानिए क्यों जरूरी है शहर से बेसहारा पशु पकड़ने
शहर में करीब 400 से 500 पशु सड़क पर घूम रहे हैं। रात के समय ये पशु मुख्य मार्ग पर सड़क के बीच आकर बैठ जाते हैं। इनके कारण हादसे होने का भय बना रहता है। पुलिस विभाग की रिपोर्ट में भी सामने आ चुका है कि 90 हादसों में 30 लोगों की मौत हो चुकी है। ये रिपोर्ट आरटीआई के द्वारा 2016 में सामने आई थी।
लावारिस पशुओं से ये हो चुके हादसे
खंड सड़क हादसे मृतक घायल
फतेहाबाद शहर 10 11 11
सदर फतेहाबाद 36 10 54
रतिया 10 7 -
जाखल 6 0 6
भूना 02 02 -
टोहाना 00 00 00
भट्टू 00 00 00
(वर्ष 2015 और 2016 के आंकड़े)
गोशाला और नंदीशाला की स्थिति
शहर व इसके आसपास क्षेत्र में फिलहाल तीन गोशाला और एक नंदीशाला है। नंदीशाला मताना पंचायत की जगह पर चल रही है और इसमें 1450 पशु हैं। नप इसके लिए करीब सवा लाख रुपये का भुगतान कर रही है। इसके अलावा बीघड़ रोड पर ही गोशाला चल रही है। शिवालय मार्केट में गौशाला है और भोडिय़ा खेड़ा में भी एक गोशाला चल रही है। अधिकारी खुद मान रहे हैं कि पिछले करीब नौ माह से एक भी पशु शहर से नहीं पकड़ा है।
वर्जन
मेरे संज्ञान में ये मामला अभी आया है, हमारा मकसद पशुओं का पकड़कर गौशाला छोडना है। प्रधान क्यों मना कर रहे हैं, इस बारे में पता करता हूं।
विवेक पदम, एडीसी
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स्ट्रे कैटल का टेंडर एडीसी के कहने पर लगाया गया था, गौ सेवा आयोग इसका भुगतान करेगा। प्रधान मालिक हैं, मैं इस बारे में अब कुछ नहीं कह सकता हूं।
- जितेंद्र कुमार, ईओ, नगर परिषद फतेहाबाद।