फतेहाबाद में सीपीसीबी की वीडियो कांफ्रेंसिंग में भाग लेते अधिकारी।
फतेहाबाद। पराली प्रबंधन को लेकर अब पराली से बनने वाली कृत्रिम लकड़ी के प्लांट लगाने के लिए अपेक्षित लोगों को सहायता मिलेगी। इसको लेकर कृषि विभाग व पंचायत विभाग से संपर्क किया जा सकता है। इस मामले में शुक्रवार को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जिले के सभी अधिकारियों से वीडियो क्रांफ्रेंसिंग के माध्यम से चर्चा भी की है।कृत्रिम लकड़ी बनाने के लिए जो प्लांट बनाए जाते हैं वह धान के भूसे पर आधारित होते हैं और इनको टॉरफेक्शन संयंत्रों में बनाया जाता है। इन संयंत्रों में धान के भूसे में सरसों का तूड़ा व गेहूं की तूड़ी मिलाकर इसे एक तरह से कृत्रिम लकड़ी का रूप दे दिया जाता है, जिसे जैव कोयला भी बोला जाता है। यह लकड़ी एक तरह से काेयले के समान होती है और इसका प्रयोग बिजली संयंत्रों में कोयले की आपूर्ति के लिए किया जा सकता है। सरकार के द्वारा टारफेक्शन संंयंत्र स्थापित करने के लिए लोगों और कंपनियों को वित्तीय सहायता दी जाएगी। ज्ञात रहे कि देश व प्रदेश में चल रहे बिजली संयंत्रों में बायोमास की मांग अधिक रहती है, ऐसे में यह संयंत्र काफी कारगर सिद्ध हो सकते हैं और किसानों को पराली जलाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।
फतेहाबाद जिला पराली जलाने के मामले में इस साल पूरे प्रदेश में नंबर-1 पर रहा है। ऐसे में पराली प्रबंधन को लेकर अगर इन संयंत्रों के लिए लोग सामने आते हैं, तो इससे एक तो किसानों को फायदा होगा, दूसरा संयंत्र मालिक भी बिजली संयंत्रों में यह कृत्रिम लकड़ी कोयले में परिवर्तित करके भेज सकेंगे और उनको भी इससे लाभ होगा।
सीपीसीबी ने ली अधिकारियों की बैठक
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से धान के भूसे पर आधारित टॉरफेक्शन संयंत्र के संबंध में शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से फतेहाबाद के अधिकारियों की बैठक भी ली। बैठक में पराली प्रबंधन को लेकर विस्तार से चर्चा की गई है। सीपीसीबी की ओर से ली गई बैठक में बताया कि पराली प्रबंधन को लेकर आगे आने वाली कंपनियों व लोगों को को सरकार द्वारा एकमुश्त सहायता भी प्रदान की जाती है। वीसी में प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड हिसार से आरओ विनोद बाल्यान, कृषि उपनिदेशक डॉ. राजेश सिहाग, पंचायत राज संस्थाओं व नगर निकाय विभाग के अन्य अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
कोट
कृषि, पंचायत तथा नगर निकाय विभाग के अधिकारियों से कहा कि जिला में पराली प्रबंधन बारे किसानों को जागरूक करें। अगर कोई टारफेक्शन संयंत्र के लिए आवेदन करना चाहे तो वह संबंधित अधिकारियों से मिल सकता है। इससे पराली प्रबंधन को काफी फायदा होगा। साथ ही पंचायत व कृषि अधिकारी भी पराली न जलाने को प्रेरित करने के लिए जिले में जनजागरण अभियान भी चलाएं।
-सुरेश कुमार, नगराधीश, फतेहाबाद।