प्रदेश सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद आरटीए कार्यालय की सेवाओं में सुधार नहीं हो रहा है। वीरवार को पासिंग के दिन जिलेभर से आए वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। दो सप्ताह बाद हुई पासिंग प्रक्रिया के दौरान भी नवनियुक्त आरटीए सचिव शालिनी चेतल ने छोटी-छोटी खामियां निकालकर वाहनों को पास करने से इंकार कर दिया।
बता दें कि किसी ट्रक का शीशा न होने तो किसी वाहन पर वायपर न चलने से ही आरटीए सचिव ने पासिंग फाइल पर रोक लगा दी और वाहन चालकों को अगली बार आने का फरमान सुना दिया। इससे नाराज वाहन चालकों ने सुबह कुछ देर के लिए हंगामा भी किया। चालकों ने विरोध जताते हुए कहा कि 20 दिन बाद पासिंग हो रही है। अब छोटी-छोटी कमियां निकालकर फिर से तारीख दे दी जाएगी। इससे उन्हें हजारों रुपये का नुकसान झेलना पड़ता है। दरअसल, फतेहाबाद में पुराने वाहनों की पासिंग के लिए केवल सप्ताह में वीरवार का दिन निर्धारित होता है। पासिंग एचएसवीपी के सेक्टर-3 में होती है। पिछले वीरवार को आरटीए सचिव छुट्टी पर थीं जबकि उससे पहले वीरवार को शिवरात्रि की छुट्टी थी। इस कारण एक साथ 800 से अधिक वाहन पासिंग के लिए पहुंच गए।
वाहन चालक बोले- सुबह 8 बजे आकर लाइन में लगे थे, दोपहर 12 बजे तक नहीं आई बारी
वाहन चालकों में इस बात का अधिक गुस्सा था कि अधिकारियों की लेट लतीफी की वजह से उन्हें परेशानी उठानी पड़ती है। सुबह 8 बजे आकर लाइन में लगने के बाद भी दोपहर 12 बजे तक पासिंग नहीं हो पाई थी। 50 से अधिक तो स्कूलों की वैन आई हुई थी, जिनको चालकों को लंबी कतार में लगना पड़ा। स्थिति ऐसी रही कि सेक्टर 3 के कॉम्पलेक्स से लेकर जीटी रोड पर लघु सचिवालय तक वाहनों की लाइन लगी रही। ट्रैफिक पुलिस के कर्मचारियों को यातायात व्यवस्था संभालने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
सिफारिश वालों की हाथोंहाथ होती रही पासिंग
वाहन चालकों ने आरोप लगाया कि पासिंग के दौरान अधिकारियों के पास पहले नंबर लगाने के लिए खूब सिफारिशें आती हैं। ऐसा ही वीरवार को भी देखने को मिला। जिनकी सिफारिश आई, उनके वाहनों की तत्काल पासिंग हो गई। अमर उजाला संवाददाता के सामने भी ऐसा मामला देखने को मिला। एक पुलिसकर्मी ने आकर आरटीए सचिव शालिनी चेतल को पहले नंबर लगाने को कहा। उन्होंने तत्काल उसकी कार के पास जाकर उसकी पासिंग कर दी जबकि पुलिसकर्मी के वाहन का फार्म तक सही से नहीं भरा हुआ था।
आधा घंटा ज्यादा लगाने पर भी सभी वाहनों की नहीं हो पाई जांच
आरटीए सचिव ने वाहनों की संख्या ज्यादा देखते हुए शाम 5 बजे ही प्रक्रिया रोकने की बजाय आधे घंटे का अतिरिक्त समय लगाया। मगर इसके बावजूद सभी वाहनों की जांच नहीं हो पाई। करीब 200 से अधिक वाहनों को बिना पासिंग के ही लौटना पड़ा। इन वाहन चालकों को अगले वीरवार आने के लिए कहा गया है।
कोट दो वीरवार को पासिंग नहीं हुई थी। इसलिए इस वीरवार सुबह जल्दी आकर लाइन में लगे थे। दोपहर 12 बजे बाद आरटीए सचिव ने जांच की तो ट्रक के अगले हिस्से में खामियां बताकर पासिंग करने से इंकार कर दिया।
योगेश कुमार, ट्रक चालक।
कोट
25 किलोमीटर से वाहन लेकर आए हैं। दोपहर 12 बजे तक तो नंबर आया नहीं है। स्कूली वाहनों की जांच के लिए अलग से सिस्टम बनाना चाहिए। हमें बच्चों को स्कूल व घर भी छोड़ना होता है। सारा दिन पासिंग में ही लग जाता है।
करनैल सिंह, स्कूल वैन चालक।