समैन(फतेहाबाद)। गुरुग्राम में वीरवार रात को साढ़े ग्यारह बजे पुलिस से मुठभेड़ के दौरान अपने साथियों के साथ एनकाउंटर में मारे गए संदीप उर्फ दीपा (35) 17 साल पहले गांव समैन के बस स्टैंड पर फल बेचने का काम करता था। इसके अलावा कोरोना काल के बाद 2021 में दीपा ने खेतीबाड़ी का काम करके गांव में अपनी पहचान बनाने की कोशिश की थी लेकिन बाद में अपराध की दुनिया में कदम रखता गया।
दीपा की मां धनपति ने बताया कि वह पांचवीं पास था। वह परिवार से बहुत कम मिलता था। ज्यादातर चंडीगढ़ या पंचकूला रहता था। दीपा के तीन भाई और हैं। दीपा परिवार में सबसे छोटे भाई सुबेर से बड़ा था। दीपा से बड़े भाई राममेहर की सात साल पहले सड़क हादसे में मौत हो चुकी है।
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एक साल पहले आया था घर
दीपा की मां के अनुसार वह अपने मामा की बरसी पर 10 सितंबर 2025 को घर पर आया था। उसके बाद वह घर नहीं आया। दीपा के पिता बेदा राम करीब 7 साल से घर से बाहर ही रहते हैं। धनपति ने बताया कि उनकी एक बाजू में दर्द रहता है जिसके कारण उन्हें दीपा के बारे में कोई ज्यादा जानकारी नहीं है।
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दीपा पर दर्ज है 14 मामले
संदीप उर्फ दीपा निवासी समैण के खिलाफ थाना सदर टोहाना और शहर में शस्त्र अधिनियम के तीन, हिसार के उकलाना में एक, थाना शहर टोहाना में चोरी का एक, हांसी में हत्या प्रयास के आरोप में एक, थाना शहर टोहाना में चोरी का एक, थाना सदर हिसार में हत्या प्रयास का एक, थाना टोहाना में हत्या प्रयास, थाना भूना में डकैती और सदर थाना टोहाना में मारपीट और अपहरण के आरोप में एक प्राथमिकी दर्ज है।