फतेहाबाद। प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में मिड-डे-मील के लिए भेजे गए सूखे राशन की गुणवत्ता को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। जिले के कई स्कूलों ने गुड़ और राजमा की खराब गुणवत्ता की शिकायतें दर्ज करवाई हैं। हाल ही में टोहाना के बिढाई खेड़ा प्राइमरी स्कूल में खराब राजमा की आपूर्ति का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जिससे मामले ने और जोर पकड़ा।
मौलिक शिक्षा विभाग ने इस मामले को निदेशालय तक पहुंचाने के बाद एग्रो इंडस्ट्रीज कारपोरेशन लिमिटेड (एचएआईसीएल) के मैनेजर को पत्र लिखकर निर्देश दिए हैं कि खराब राशन बदलकर उच्च गुणवत्ता का नया राशन भेजा जाए। अंबाला, फतेहाबाद, हिसार, कैथल और यमुनानगर जिलों में यह कार्रवाई अनिवार्य की गई है।
साथ ही, इन जिलों के जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को भी आदेश जारी किए गए हैं कि वे सुनिश्चित करें कि स्कूलों में वितरित होने वाला राशन गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित हो। निदेशालय के पत्र में उल्लेख किया गया है कि कुछ स्कूलों ने शिकायत में बताया कि एचएआईसीएल की ओर से भेजी गई मिड-डे-मील सामग्री में फफूंद लगी हुई और गुणवत्ता कम पाई गई।
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने पहले भी गुड़ की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे। अब विभाग ने यह सुनिश्चित करने के लिए कि बच्चों को पौष्टिक और सुरक्षित भोजन मिले, त्वरित कदम उठाने की आवश्यकता जताई है। स्कूलों में सही सामग्री भेजने और वितरण प्रक्रिया पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
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इधर, छात्राओं से तैयार करवाया जा रहा है राशन
शिक्षा विभाग ने मिड-डे-मील तैयार करने के लिए स्कूलों में कुक और सहायक तैनात कर रखे हैं। जबकि फतेहाबाद के पीएमश्री राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में छात्राओं से राशन तैयार करवाया जा रहा है। स्कूल प्रिंसिपल कक्ष के पास ही मिड-डे-मील तैयार करने की व्यवस्था है और अधिकारियों का आना-जाना रहता है।
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मिड-डे-मील संबंधित सामान अगर कहीं खराब आ रहा है तो संबंधित स्कूल पहली बार रिसीव न करें। अगर सामान आ चुका है और वह खराब है तो संबंधित एजेंसी से बदलवा सकते हैं।
- अनीता बाई, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी