फतेहाबाद। जिले के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील योजना की स्थिति गंभीर होती नजर आ रही है। शिक्षकों का कहना है कि पिछले तीन महीने से राशन और कुकिंग खर्च नहीं लिया जबकि शिक्षा विभाग ने बजट की कमी से इन्कार करते हुए स्कूल स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्था अपनाने की बात कही है।
शिक्षक संघ के जिला संरक्षक सुरेन्द्र नैन और जिला प्रधान योगेन्द्र वर्मा ने बताया कि दिसंबर से अब तक स्कूलों में भोजन पकाने की राशि नहीं पहुंची। इस कारण कई स्थानों पर शिक्षक अपनी जेब से खर्च कर बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बार-बार अलग-अलग माध्यमों से राशन लेने के निर्देश मिलते रहे लेकिन आपूर्ति नहीं हुई। गैस सिलिंडर की कमी ने समस्या को और गंभीर बना दिया है।
संघ के जिला महासचिव अनूप गोरा ने कहा कि लंबे समय तक व्यक्तिगत खर्च उठाना संभव नहीं है और इस स्थिति से शिक्षक मानसिक व आर्थिक दबाव में हैं। वहीं जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी ने बजट की कमी से इन्कार किया। उनका कहना है कि स्कूल उपलब्ध संसाधनों के आधार पर व्यवस्था कर सकते हैं, जैसे स्थानीय स्तर पर खरीद या वैकल्पिक ईंधन का उपयोग।
हालांकि इस संबंध में किसी औपचारिक निर्देश पत्र की जानकारी शिक्षकों तक नहीं पहुंची है जिससे असमंजस की स्थिति बनी हुई है। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राज्य चेयरमैन देवेंद्र दहिया ने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह में राशन आपूर्ति और लंबित राशि जारी नहीं हुई तो स्कूलों में मिड-डे मील बंद करने के लिए मजबूर हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
स्कूलों में मिडिल तक 63,997 विद्यार्थी
जिले में मिड-डे मील योजना के तहत लगभग 462 सरकारी स्कूल आते हैं। इनमें प्राथमिक और मिडिल स्कूल शामिल हैं। इन स्कूलों में लगभग 63,997 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इनमें प्राथमिक स्तर के 36,635 और मिडिल स्तर कक्षाओं में 27,362 विद्यार्थी हैं।
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जिले में स्कूल और विद्यार्थी
प्राइमरी स्कूल : 384
मिडिल स्कूल : 78
कुल कुक/हेल्पर : लगभग 1,420
नोट: ये आंकड़े शिक्षा विभाग से मिले सूचना के आधार पर हैं।
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ऑडिट सेल में भेजा हुआ है बजट
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी अनिता बाई ने कहा कि फरवरी तक का बजट तो है उनके पास पर जब तक अप्रूवल नहीं आती वे इसे जारी नहीं कर सकतीं। मिड-डे मील का बजट बनाकर ऑडिट सेल में भेजा हुआ है। 10 दिन में उसे अप्रूवल मिलनी होती है। इसे वे 2-3 बार रिमांडर भेज चुकी हैं। अगर 10 दिन में अप्रूवल नहीं मिलती है तो वो रद्द हो जाता है। इसे फिर से बनाकर विभाग को भेजना होता है। उनके हाथ में इतना ही है। अगर उनके हाथ बजट जारी करना हो तो वे कभी का कर देतीं।