फतेहाबाद के हिसार रोड से गुजरती बिना नाम लिखी स्कूल बस जिस पर सफेद नंबर प्लेट लगी हुई है।
फतेहाबाद। शहर में चल रहे निजी स्कूलों के संचालक ट्रांसपोर्ट सुविधा के नाम पर सरेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। इस सुविधा के बदले स्कूल संचालक 500 रुपये से लेकर 1,000 रुपये प्रति विद्यार्थी अभिभावकों से लेते हैं। जब स्कूल बसों को लेकर पड़ताल की गई तो सामने आया कि ये तय सीमा से ज्यादा गति से दौड़ रही हैं।
वहीं स्कूल की छोटी वैन में तय सीमा से ज्यादा विद्यार्थी बिठाए जा रहे हैं। यहां तक कि नियम के अनुसार स्कूल बसों के रंग भी पीले नहीं है। इसके अलावा स्कूल बसों पर पीले रंग की नंबर प्लेट होने का प्रावधान है, लेकिन कुछ बसें सफेद रंग की प्लेट में सड़कों पर दौड़ रही है। कई स्कूल बस पर स्कूल का नाम भी नहीं लिखा हुआ।
गौरतलब है कि जिले में एक हजार से अधिक बसें परिवहन विभाग के पास पंजीकृत हैं। वहीं कुछ स्कूल बसों में परिचालक तक नहीं है। बसों में फर्स्ट एड किट भी नहीं रखी गई है। वहीं शिक्षा विभाग, परिवहन विभाग व प्रशासन इसको लेकर गंभीर नहीं है। आरटीए कार्यालय अधिकारियों की मानें तो इसके तहत 50 दिन अभियान चलाकर 573 बसों की जांच की गई है। इस दौरान कई स्कूल बसों के चालान भी किए गए हैं।
केस एक
शहर के हिसार रोड पर एक निजी स्कूल की वैन दोपहर करीब दो बजे विद्यार्थियों को उन्हें घर पर छोड़ने के निकलती है। पड़ताल में सामने आया है कि वैन में तय सीमा से ज्यादा विद्यार्थी थे। स्कूल वैन पर स्कूल का नाम ही नहीं लिखा हुआ था। वहीं वैन पर पीले रंग के बजाय सफेद रंग की नंबर प्लेट लगी हुई थी।
केस दो
शहर के पुरानी कचहरी रोड से बस लाल बत्ती चौक की ओर जा रही थी। इस वैन में स्कूल के विद्यार्थी थे, लेकिन बस का रंग पीला नहीं था। यहां तक कि आपातकालीन स्थिति या लापरवाही की सूचना देने के लिए कोई नंबर भी इस पर नहीं लिखा मिला। इसके अलावा इस पर स्कूल का नाम भी अंकित नहीं था। वहीं प्रावधान यह कि बस का रंग पीला होना चाहिए और स्कूल का नाम व मोबाइल नंबर भी लिखा होना चाहिए।