कृष्ण लाल पंवार के रूप में नए परिवहन मंत्री मिलने पर फतेहाबाद में रोडवेज विभाग को भी नई आशाएं जगी थी। लेकिन वह सारी उम्मीदें धरी की धरी रह गई। जब प्रदेश सरकार ने हिसार रोड पर बनाए जाने वाले प्रस्तावित बस अड्डे के लिए जमीन को भी कम कर दिया।
पहले जहां फतेहाबाद के नए बस स्टैंड के लिए 12 एकड़ जमीन प्रस्तावित थी। वहीं अब इसको घटाकर 8 एकड़ कर दिया गया है। बता दें फतेहाबाद रोडवेज विभाग कर्मचारियों और बसों की कमी दंश झेल रहा है। इस बाबत आम आदमियों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
214 ड्राइवर की जगह हैं 194
फतेहाबाद में 214 ड्राइवर की जगह 194 ड्राइवर सारथी बने हुए। अधिकारी ड्राइवरों की नियुक्ति की बात अधिकारी कर तो रहे हैं। लेकिन उसको लेकर समय सीमा के बारे में अभी कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं।
वहीं बसों की बात करें तो फतेहाबाद में 110 और टोहाना में कुल 43 बसें हैं। लेकिन उनमें से 7 बसें रोजाना सर्विस के लिए वर्कशाप में लगती हैं। तो इस तरह सड़क पर हर दिन फतेहाबाद से 106 बसें चलती हैं और टोहाना से 40 बसें।
बसों की कमी से परेशान होकर छात्र आए दिन लगाते हैं जाम
बसों की कमी से परेशान होकर आए दिन विद्यार्थी जाम लगा रहे हैं। जिले में पिछले दस दिनों में पांच बार विद्यार्थी बसों को नियमित चलाने और रूट को बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर चुके हैं।
विद्यार्थियों का कहना है कि हमारे रूट पर बसें नियमित आती नहीं हैं। आती भी है तो उनके स्टॉपेज नहीं हैं, मजबूरन हमें प्राइवेट बसों का सहारा लेना पड़ता है। लेकिन प्राइवेट बसें हमारे पासों को नहीं मानती जिसके कारण वह हमारे साथ बदतमीजी से भी पेश आते हैं।
प्रदेश भर में रोडवेज की व्यवस्था है पंक्चर
नए परिवहन मंत्री पंवार तो नए हैं लेकिन उनके सामने चुनौतियां तो सालों पुरानी ही हैं। सरकार का कार्यकाल एक साल होने को आया, लेकिन रोडवेज में सुधार के नाम पर सीएम की ओर से सिर्फ एक ही घोषणा हुई है कि सरकारी बेड़े में 1100 नई बसों को शामिल किया जाएगा।
पंवार ने भी सीएम की तर्ज पर ही एक हजार नई बसों को रोडवेज बेडे़ में शामिल करने की घोषणा कर डाली है। अब इसकी गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साढ़े 3 सौ बसों की पहली खेप गुड़गांव स्थित प्रदेश वर्कशाप में तैयार हैं लेकिन कोई भी रोडवेज डिपो उनको लेने के लिए तैयार नहीं है। वजह, ड्राइवरों-कडंक्टरों की कमी।
वर्तमान में 8100 बसों की जरूरत, हैं महज 4000
प्रदेश के रोडवेज विभाग पर जनसंख्या का बोझ इतना है कि वर्तमान बेड़े में मौजूद 4000 बसें किसी भी हालत में पर्याप्त नहीं हो पा रही हैं। रोडवेज वर्कर यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष सरबत सिंह पूनियां की मानें तो इस वक्त प्रदेश में कम से कम 8000 बसों की दरकार है। अगले पांच साल तक वो जरूरत के इस आंकड़े को दस हजार से अधिक करने की मांग करते हैं।
ड्राइवर, कडंक्टर, मैकेनिक कर रहे ओवरटाइम
रोडवेज में इस वक्त कर्मचारियों का सबसे अधिक टोटा है। हालात ये हो चुकी है कि मौजूदा बसों को चलाने के लिए भी रोडवेज के पास पर्याप्त ड्राइवर और कडंक्टर नहीं हैं। और इससे फतेहाबाद भी अछूता नहीं है। आलम यह है कि ड्राइवरों-कडंक्टरों से ओवरटाइम लिया जा रहा है। जो हादसे का कारण बन सकता है।
ये हैं अड़चनें
1. 2 साल से बोनस पेंडिंग
2. 5 साल से वर्दी भत्ता पेंडिंग
3. 20 साल से वर्कशाप में भर्तियां बंद
4. 4 माह से गुड़गांव में 350 बसें तैयार, पर डिलीवरी लेने को कोई तैयार नहीं
5. प्रदेश भर में महज 50 चेकिंग इंस्पेक्टर, 400 पोस्ट खाली
6. 5200 वर्क शाप पद, 2400 पद खाली
ये है रोडवेज का लेखा-जोखा
डिपो : 21
सब डिपो : 16
प्रदेश वर्कशाप : 2
रोडवेज बसें : 4100
वर्तमान जरूरत : 8000 बसें
पांच साल में : 10000 बसें
फतेहाबाद में भी कमोबेश यही हालात
कुल ड्राइवर : 194
आवश्यकता है : 214
फतेहाबाद जिलेे में कुल बसें : 153
फतेहाबाद : 110
टोहाना : 43
रोजाना सर्विस के लिए वर्कशाप में : 7 बसें
इसका मतलब फतेहाबाद से 106 बसें चलती हैं और टोहाना से 40 बसें।
सरकार रोडवेज में जब तक पक्की भर्तियां नहीं करेगी, तब तक रोडवेज में समस्या का हल नहीं होगा। फिलहाल तो सरकार हमारी मांगों पर गंभीर नजर नहीं आती।
सरबत सिंह पूनियां, प्रदेशाध्यक्ष, हरियाणा रोडवेज वर्कर यूनियन।
फतेहाबाद जिले को 13 नए ड्राइवर मिलने की उम्मीद है। उनके ज्वाइन करने के बाद हालात सुधरने की उम्मीद है। इस साल एक दर्जन कर्मचारियों की रिटायरमेंट है। उच्चाधिकारियों को लिखा है कर्मचारियों की कमी के बारे में।
लेखराज, जिला महाप्रबंधक, रोडवेज, फतेहाबाद।