7 जनवरी तक चलने वाले इस अभियान के दौरान रोडवेज कर्मचारियों द्वारा जनता को सरकार की जनविरोधी व कर्मचारी विरोधी नीतियों को अवगत करवाया गया।
रोडवेज वर्कर्स यूनियन के प्रधान सूरजभान चोपड़ा ने कहा कि यह अभियान तय करेगा कि प्रदेश की जनता सरकारी परिवहन सुविधा चाहती है।
सरकार की निजीकरण की नीतियों के खिलाफ लोगों में काफी रोष दिखा और काफी संख्या में लोगों ने हस्ताक्षर कर अपना विरोध दर्ज करवाया।
चोपड़ा ने मांग रखी कि सरकार को जनभावनाओं का सम्मान करते हुए और कर्मचारियों के आंदोलन से सबक लेकर विभाग में 10 हजार नई बसों को शामिल किया जाए ताकि 70 हजार बेरोजगारों को रोजगार मिल सके।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने अब भी कोई सबक नहीं लिया तो कर्मचारियों द्वारा आंदोलन को तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार एक सोची-समझी साजिश के तहत रोडवेज के आकार को घटा रहा है।
प्रत्येक डिपो के 25 किलोमीटर के दायरे में पड़ने वाले गांवों से सरकारी बसों के संचालन पर रोक लगा दी गई है। सभी श्रेणियों के हजारों पद खाली होते हुए भी उन पर भर्ती नहीं की जा रही।
उन्होंने कहा कि युवाओं को पक्की नौकरी देने की बजाय सरकार विभाग को निजी हाथों में सौंपकर अपनी जिम्मेवारी से पल्ला झाड़ना चाहती है।
हस्ताक्षर अभियान में हवा सिंह राड़, कीमत ढांडा, केशव, जोगिन्द्र रेहडू, अमित शर्मा, बलवान सिंह नेहरा, शिव कुमार, श्योनारायण, संजय बेरवाल सहित अनेक रोडवेज कर्मचारियों ने भाग लिया।