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घग्गर नदी का जलस्तर बढ़ा, लोग सहमे, कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द

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17एफटीबीपी15-16 : रतिया से होकर गुजर रही घग्गर नदी में फि लहाल पानी की स्थिति । - फोटो : Fatehabad
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फतेहाबाद। मानसून के आते ही फतेहाबाद जिले से होकर बहने वाली घग्गर नदी का जलस्तर बढ़ गया है। इससे तटवर्ती क्षेत्रों में बसे गांवों के लोग भयभीत हैं। घग्गर के तटबंध कमजोर होने से जिले में तकरीबन 10 बार बाढ़ अपनी विनाशलीला दिखा चुकी है। बाढ़ से यहां 106 गांवों की आबादी के अलावा हजारों एकड़ भूमि जलमग्न हो जाती है। हालांकि इस बार जिला प्रशासन ने 30 जून को ही बाढ़ संभावित क्षेत्रों को चिह्नित कर लिया है।
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बुधवार को घग्गर में बढ़ते जलस्तर को देखते हुए एहतियात के तौर पर कंट्रोल रूम भी स्थापित कर दिया है। बुधवार को गुहला-चीका में 50774 क्यूसेक, खनौरी में 11875 व फतेहाबाद के चांदपुरा साइफन में 8810 क्यूसेक पानी का बहाव दर्ज किया गया जो मंगलवार के मुकाबले कई गुणा ज्यादा है। मंगलवार को चांदपुरा का बहाव महज 1650 क्यूसेक ही दर्ज किया गया था। हालांकि इसकी क्षमता 21 हजार क्यूसेक की है। जिला प्रशासन ने सावधानी बरतते हुए जिला राजस्व विभाग के कर्मचारियों की छुट्िटयां रद्द कर दी हैं।
ऐसे जिले में प्रवेश करता है घग्गर का पानी
हिमाचल प्रदेश की शिवालिक की पहाड़ियों में बारिश होती है तो इसका पानी कालका में बने गड्ढे में गिरता है और यहीं से घग्गर नदी शुरू होती है जो कालका से चलकर पंजाब के पटियाला, गुहला-चीका, कैथल व खनौरी से होते हुए फतेहाबाद जिले में प्रवेश करती है। यहां टोहाना, जाखल, चांदपुरा, रतिया से होते हुए सिरसा होते हुए पाकिस्तान की ओर निकल जाती है। फतेहाबाद में घग्गर तटवर्ती क्षेत्रों में बसे 60 गांव ऐसे हैं जो 1962 के बाद दस बार बाढ़ की विभीषिका झेल चुके हैं। समय पर मरम्मत नहीं होने से घग्गर के रिंग बांध चूहे खोखला कर देते हैं। मानसून के समय जब पानी का बहाव तेज होता है तो घग्गर के तटबंध टूट जाते हैं।
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ये गांव होते हैं बाढ़ से प्रभावित
संभावित बाढ़ से प्रभावित होने वाले 106 गांवों को प्रशासन चिह्नित कर चुका है। इनमें रजाबाद, धीड़, माजरा, बरसीन, बीसला, खानपुर, हिजरावांकलां, खान मोहम्मद, भड़ोलावाली, बैजलपुर, बहलभूमिया, रामपुरा, भिरडाना, ढाणी मसीता, चेतनपुरा, मल्लड़, काताखेड़ी, बोसवाल, अयालकी, ढाणी ठोबा, दौलतपुर ढाणी, छतरियां ढाणी, ढाणी ईसर, ढाणी ढाका, हिजरावांखुर्द, नकटा, रत्ताटिब्बा, अहलीसदर, भट्टू खुर्द, के अलावा जाखल के 30, रतिया के 28 व फतेहाबाद के 37 गांव शामिल हैं। फतेहाबाद से गुजर रही रंगोई खरीफ चैनल की क्षमता सात हजार और साढ़े आठ हजार क्यूसिक की थी। बाढ़ को देखते हुए 2015 में सरकार ने इसकी क्षमता 675 क्यूसिक बढ़ा दी। ताकि बाढ़ का पानी रंगोई में आ सके।
मोटरबोट इंजन, कट्टे के अलावा किश्ती भी तैयार
प्रशासन ने बाढ़ से बचाव के लिए प्रबंध कर लिए है। जिला राजस्व विभाग के अनुसार प्रशासन के पास बोट, चप्पू, लाइफ जैकेट, मोटरबोट इंजन, कट्टे के अलावा किश्ती भी तैयार कर ली गई हैं। फतेहाबाद में साल 1962, 1976, 1977, 1983, 1988, 1993, 1995, 1998, 2010 में बाढ़ अपनी विनाशलीला दिखा चुकी है। इन गांवों में बसे बुजुर्ग उन दिनों को कभी नहीं भूले हैं। गांव रजाबाद के बीका सिंह ने बताया कि 1998 में आई बाढ़ ने आसपास के 20 गांवों को चपेट में ले लिया था। गांवों की ढाणियों में पीने को पानी तक नहीं था। गांव की आबादी की 80 फीसदी लोग पलायन कर सुरक्षित जगह पर चले गए थे। खेतों में धान की फसल के बाद गेहूं की बिजाई भी नहीं हो पाई थी। इस बाढ़ से दो फसलें प्रभावित हुई थी। 11 जुलाई 2010 में फतेहाबाद से गुजर रही घग्गर के साइफन में रिकार्डतोड़ पानी बहता गया। यहां 21 हजार क्यूसिक पानी का बहाव दर्ज किया गया जबकि इसकी क्षमता 20 हजार क्यूसिक है। सामान्य तौर पर यहां पर 4 हजार क्यूसिक ही पानी का बहाव रहता है।
वर्जन
बाढ़ से निबटने के लिए पुख्ता प्रबंध हैं। कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। रंगोई नाले की क्षमता बढ़ा दी गई है। फतेहाबाद, टोहाना व रतिया में कंट्रोल रूम स्थापित कर दी गई हैं। इन कंट्रोल रूम में वायरलैस सैट उपलब्ध रहेगा।’
- राजेश कुमार, जिला राजस्व अधिकारी, फतेहाबाद।
वर्जन
घग्गर के तटवर्ती क्षेत्रों व बाढ़ संभावित इलाकों के रिंग बांध का पिछले दिनों जायजा लिया था। जिले के सभी बीडीपीओज को जरूरी निर्देश जारी कर दिए थे। रिंगबांध की स्थिति संतोषजनक है। बाढ़ राहत के लिए जिला प्रशासन चाकचौबंद है।
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- अनुभव मेहता, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी, फतेहाबाद।
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