फतेहाबाद। जल संकट के बढ़ते खतरे के बीच प्रो. सुभाष शर्मा जल संरक्षण की प्रेरक मिसाल बनकर उभरे हैं। एमएम कॉलेज से सेवानिवृत्त प्राचार्य प्रो. सुभाष शर्मा अपने दैनिक जीवन में पानी बचाने की आदतों को अपनाकर समाज को भी जागरूक कर रहे हैं। प्रो. शर्मा न केवल पानी बचाने की बात करते हैं बल्कि अपने दैनिक जीवन में इसे सख्ती से अपनाकर लोगों को प्रेरित भी कर रहे हैं।
हिसार के डीएन कॉलेज में भी सेवाएं दे चुके प्रो. सुभाष शर्मा घर के छोटे-छोटे कामों में भी पानी की बर्बादी रोकने पर विशेष ध्यान देते हैं। वे कपड़े धोने के दौरान निकलने वाले पानी को व्यर्थ नहीं जाने देते। कपड़ों को धोने और निचोड़ने के दौरान जो पानी निकलता है उसका उपयोग वे पौधों में करते हैं। इससे न केवल पानी की बचत होती है बल्कि पौधों की सिंचाई भी हो जाती है।
इतना ही नहीं, वे घर में पोछा लगाने के बाद बचने वाले पानी को भी फेंकने के बजाय अन्य सफाईकार्यों में इस्तेमाल करते हैं। उनका मानना है कि यदि हर व्यक्ति अपने स्तर पर थोड़ी-सी सावधानी बरते, तो बड़ी मात्रा में पानी बचाया जा सकता है। प्रो. शर्मा का कहना है कि पानी प्रकृति की अमूल्य धरोहर है जिसे बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संरक्षण बेहद जरूरी है।
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जिले में 8 हजार अवैध कनेक्शन
जिले में करीब आठ हजार पानी के अवैध कनेक्शन है। ग्रामीण क्षेत्रों में हालात यह है कि खुले में पानी बह रहा है। इन पर टोंटी तक नहीं लगी है। विभाग का दावा है कि पानी बचाने के लिए करीब चार हजार टोंटी लगाई जा चुकी है।
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यदि हर घर में पानी का सही से सदुपयोग किया जाए तो जल संकट जैसी समस्या से काफी हद तक निपटा जा सकता है। छोटी-छोटी कोशिशें मिलकर बड़ा बदलाव ला सकती हैं।
- सतपाल रोज, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग
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पानी बचाने के लिए जनस्वास्थ्य विभाग की तरफ से अभियान चलाए जा रहे हैं। खुले में चल रहे पानी बहने से रोकने के लिए विभाग की तरफ से टोंटी लगाई जा रही है।
- शर्मा चंद लाली, जिला सलाहकार, जनस्वास्थ्य विभाग