फतेहाबाद। सिरसा जिले में सामान्य पात्रता परीक्षा (सीईटी)को लेकर बनाए गए परीक्षा केंद्रों तक जाने के लिए पहले दिन करीब 15 हजार अभ्यर्थियों ने विशेष बस सेवाओं का लाभ उठाया।
हरियाणा रोडवेज और सहकारी समिति की बसों के माध्यम से इतनी बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों के आवागमन ने जहां परीक्षा देने वालों को सुविधा प्रदान की। वहीं आम यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बसों की कमी के चलते घंटों तक इंतजार करना पड़ा और कई यात्रियों को तो परीक्षा वाली बसों में ही गंतव्य तक भेजा गया। इससे उनकी यात्रा और भी असहज हो गई। सुबह तीन बजे से ही फतेहाबाद बस स्टैंड पर अभ्यर्थियों का लाया गया था। जैसे ही एक बस में सीट के मुताबिक अभ्यर्थियों की संख्या पूरी होती उस बस को सिरसा के लिए रवाना कर दिया जाता। वहीं चयन आयोग की ओर से जिले के कुछ अभ्यर्थियों का परीक्षा केंद्र जींद में बनाया गया था उसके लिए भी रोडवेज की ओर से बस को जींद भेजा गया ताकि सभी अभ्यर्थी परीक्षा दे सकें।
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बसों का विशेष इंतजाम सुविधा और संकट दोनों साथ-साथ
सीईटी के लिए फतेहाबाद जिला प्रशासन और रोडवेज ने मिलकर व्यापक तैयारियां की थीं। अभ्यर्थियों की बड़ी संख्या को देखते हुए हरियाणा रोडवेज की 143 बसों को सिरसा के लिए रवाना किया गया। इसके अतिरिक्त, सहकारी समिति की 139 बसों को भी इस कार्य में लगाया गया, जिससे कुल 282 बसें विशेष रूप से परीक्षार्थियों को सिरसा ले जाने के लिए सड़कों पर उतरीं। इतनी बड़ी संख्या में बसों की व्यवस्था करना अपने आप में एक चुनौती थी जिसे बखूबी निभाया गया। हालांकि, इस विशेष इंतजाम का एक दूसरा पहलू भी था, जो आम जनता के लिए परेशानी का सबब बन गया।
आम यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें
अभ्यार्थियों के लिए बसों के इस व्यापक इंतजाम का सीधा असर फतेहाबाद और आसपास के क्षेत्रों में चलने वाली नियमित बस सेवाओं पर पड़ा। सामान्य दिनों में चलने वाली बसें सिरसा की ओर मोड़ दी गईं। इसका खामियाजा उन आम नागरिकों को भुगतना पड़ा, जिन्हें अपने रोजमर्रा के कामों के लिए बसों पर निर्भर रहना पड़ता है।
बस स्टैंड पर कई घंटों तक इंतजार करते दिखे यात्री बेहद निराश और परेशान नजर आए। भूना जैसे आस-पास के कस्बों और गांवों में जाने वाले यात्रियों को सबसे ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ा। एक यात्री सुरेश जो भूना जाने के लिए दोपहर को साढ़े 11 बजे से बस स्टैंड पर इंतजार कर रहा था, उसने बताया, मैं पिछले दो घंटे से यहां खड़ा हूं। कोई बस नहीं आ रही है। अगर यह परीक्षा नहीं होती, तो शायद अब तक मैं भूना पहुंच चुका होता। अधिकारियों से बात की तो उन्होंने कहा कि परीक्षा देने आए अभ्यार्थियों वाली बस में बैठ जाना, जो एक बजे के बाद चलनी थी, अभ्यर्थियों के इंतजार के बाद उसे करीब दो बजे चलाया गया।यह स्थिति केवल भूना जाने वाले यात्रियों के साथ ही नहीं थी।
निजी वाहनों का लेना पड़ा सहारा:
टोहाना, रतिया, भट्टू कलां और अन्य छोटे शहरों की ओर जाने वाले यात्रियों को भी इसी तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई लोगों को निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ा या फिर उन्हें अपनी यात्रा रद्द करनी पड़ी। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को इस दौरान विशेष रूप से परेशानी हुई, क्योंकि उन्हें भीड़भाड़ वाली बसों में या तो खड़े होकर यात्रा करनी पड़ी या फिर घंटों बस स्टैंड पर इंतजार करना पड़ा।