फतेहाबाद में लारवा को लेकर सर्वे करते हुए स्वास्थ्यकर्मीस्त्रोत स्वास्थ्य विभाग
फतेहाबाद। डेंगू पर नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अप्रैल माह से ही रैपिड फीवर सर्वे शुरू किया हुआ है। यह हर माह चलेगा। सर्वे के दौरान डोर-टू-डोर जाकर लारवा खत्म किया जा रहा है। मई माह में यह 15 दिन तक चला।
पिछले 10 सालों में जिले के डेंगू के 2131 केस मिले हैं। हालांकि आंकड़ा इससे कई गुना ज्यादा है, वजह ये है कि निजी अस्पताल पूरी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को नहीं देते हैं। हालांकि विभाग की तरफ से हर वर्ष निर्देश दिए जाते है कि निजी अस्पतालों को डेंगू मरीज मिलने पर विभाग को सूचित करना होगा। अगर नहीं करेंगे तो उन पर कार्रवाई हो सकती है।
डेंगू की जांच के लिए कार्ड टेस्ट के लिए भी रेट तय है। जबकि एलाइजा टेस्ट की सुविधा सिर्फ जिला नागरिक अस्पताल में है। एलाइजा रिपोर्ट के आधार पर ही डेंगू होने या न होने की पुष्टि होती है।
पिछले 10 सालों में यहां मिले डेंगू मरीज :
वर्ष डेंगू मरीज मिले
2015 189
2016 38
2017 419
2018 56
2019 29
2020 35
2021 993
2022 154
2023 89
2024 129
2025 0 अभी तक
प्लेटलेट्स के लिए नहीं शुरू हुआ प्रोजेक्ट
जिला मुख्यालय में शुरू होने वाला ब्लड कंपोनेट सेपरेट प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ रहा है। पिछले पांच साल से इसे शुरू करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। यहां तक कि लोक निर्माण विभाग ने कक्ष भी तैयार कर दिए हैं जिसमें मशीनें रखी जा सकें। हकीकत ये है कि नए अस्पताल के निर्माण को लेकर विभाग इसमें रूचि नहीं दिखा रहा है।
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डेंगू से बचाव के लिए विभाग लोगों को जागरूक कर रहा है। यहां तक स्कूलों में एक्टिविटी भी करवाई जा रही है। लोगों को खुद समझना होगा कि वे पानी न ठहरने दें। जहां भी पानी रुकेगा लारवा पनपेगा।
- डॉ. विष्णु मित्तल, जिला महामारी रोकथाम विशेषज्ञ, फतेहाबाद।