शहीद मनोहर लाल की तस्वीर के साथ माता-पिता व भाई का पूरा परिवार।
- फोटो : Fatehabad
गांव डूल्ट के देश भक्त मनोहर लाल ने कारगिल युद्ध में देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। उनकी इस शहादत पर परिवार को गर्व है। मगर व्यवस्था से नाराजगी है। शहीद मनोहर लाल के पिता रामेश्वर दास मावलिया व माता हरकोरी देवी ने बताया कि आज 22 साल बीत चुके हैं, लेकिन सरकार ने मनोहर लाल की याद में जिला मुख्यालय पर कोई भी स्मारक या पार्क तक नहीं बनाया। शहीद के परिवार ने बताया कि स्मारक बनाए जाने को लेकर पिछले कई वर्षों से प्रक्रिया चल रही है, मगर यह प्रक्रिया मात्र कागजों तक सीमित रह गई है।
मनोहर लाल शहादत के बाद गांव के युवाओं में सेना की भर्ती जबरदस्त जज्बा पैदा हुआ है। कारगिल युद्ध के बाद ढाणी डूल्ट के दस युवा सेना में भर्ती हो चुके हैं। करीब सौ युवा सेना में भर्ती होने के लिए रेवाड़ी व हिसार में प्रशिक्षण ले रहे हैं। ढाणी डूल्ट के युवाओं में देशभक्ति का जुनून सिर चढ़कर बोल रहा है। कारगिल युद्ध के दौरान ढाणी डूल्ट के मनोहर लाल 13 जून 1999 की शाम को आठ बजे ऑपरेशन विजय के दौरान दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए थे। मनोहर लाल ने अपने प्राणों की आहुति देकर देश की रक्षा के संकल्प को पूरा करके दिखाया था। संवाद
24 की उम्र में शहीद हुए थे मनोहर लाल
गांव ढाणी डूल्ट के रामेश्वर दास मावलिया व हरकोरी देवी के दो बेटे थे, जिनमें मनोहर लाल व राजेश कुमार थे। मनोहर लाल दसवीं पास करने के बाद 19 वर्ष की आयु में सेना में भर्ती हुए थे। जब वह 24 वर्ष के हुए तो पिता रामेश्वर दास शादी के लिए रिश्ता देख रहे थे। सगाई से पहले ही मनोहर लाल ने देश पर अपनी जान न्यौछावर कर दी। उनके शहीद होने के बाद राजेश कुमार को सरकारी नौकरी मिली और उसका विवाह कर दिया। शहीद मनोहर लाल के परिवार में पिता रामेश्वर दास, माता हर कोरी देवी, भाई राजेश कुमार, भाई की पत्नी संतरो देवी व भतीजी मनीषा, महक, वीना, हीना तथा भतीजा जयंत हैं।
स्मारक बनाने का आश्वासन ही मिल रहा है : रामेश्वर
शहीद मनोहर लाल के पिता रामेश्वर दास मावलिया ने बताया कि ढाणी डूल्ट मे सरकारी स्कूल का नाम शहीद मनोहर लाल राजकीय उच्च विद्यालय रखा और शहीद के नाम पुस्तकालय भी बनाया। पुस्तकालय में किताबें तथा अखबार तक की व्यवस्था नहीं है। सरकार से शहीद मनोहर लाल के नाम पर जिला मुख्यालय पर स्मारक बनाने के लिए कई बार गुहार लगा चुके हैं। आश्वासनों के सिवा अभी तक कुछ नहीं हुआ है। शहीद मनोहर लाल के छोटे भाई राजेश मावलिया का कहना है कि फतेहाबाद में स्मारक बनाने के साथ-साथ कॉलेज व पार्क का भी नामकरण शहीद मनोहर लाल के नाम होना चाहिए।
शहीद मनोहर लाल (फाइल फोटो)- फोटो : Fatehabad