रतिया। मानसून में बाढ़ की आशंका के चलते प्रशासन अपनी तैयारी पुख्ता करने में लगे हैं। एसडीएम सुरेश कुमार ने बताया की क्षेत्र के सभी तटबंध मजबूत कर दिए गए हैं तथा नालों में सफाई का काम लगातार जारी है।
वहीं सिंचाई विभाग के एसडीओ राजेश वर्मा ने बताया कि चिम्मो साइफन व अन्य रंगोई नाला, घग्गर नदी के आसपास सभी तटबंधों को पिछले वर्ष ही पक्का कर दिया गया था। सभी नालों की सफाई का कार्य 90% तक किया जा चुका है। इसी सप्ताह अन्य कार्य भी पूर्ण कर लिया जाएगा बता दें कि रतिया क्षेत्र से गुजरने वाली घग्गर नदी में जुलाई 2023 में क्षेत्र में बाढ़ आई थी।
घग्गर नदी पटियाला, कैथल के गुहला-चीका, खनौरी होते हुए जाखल के चांदपुरा गांव होते हुए क्षेत्र में प्रवेश करती है। जुलाई 2023 में भारी बारिश के चलते यह ओवरफ्लो हो गई थी। उस दौरान चांदपुरा साइफन पर पानी का बहाव तेज होना इसके ओवरफ्लो होने के कारण रहा था। वहां के तटबंध टूटने के चलते पानी पंजाब क्षेत्र से चिम्मो साइफन से रंगोई नालों के तटबंध को तोड़ दिया था। किसानों नेताओं ने कहा कि प्रशासन जो दावे कर रहा है वो खोखले हैं।
इन गांवों में आई थी बाढ़
घग्गर पुल पर पानी का बहाव 18 फुट तक आ गया था। जिसके चलते क्षेत्र के अलीकां, खैरपुर, अलालवास, कलोठा, पिछलिया, खाई, मलवाला, मढ, अजित नगर, बिराबदी, शरन, रतिया, कमाना, रतनगढ़, बलियाला, बोड़ा, नंगल, बबनपुर, लांबा, कंवलगढ़, महमड़ा, भानीखेड़ा, मिरोना, नथवान, तेलीवाड़ा, लाली, घासवा, एमपी सोत्र, चंदो कलां, चंदो खुर्द, चिम्मो, कलंदरगढ़, बुर्ज, बादलगढ़, हसंगा, पालसर, रायपुर, गुरुसर, अहरवां, सहनाल, कुनाल, मघावाली, सुखमनपुर सहित 52 गांवों की 35405 एकड़ में बाढ़ से फसलों को नुकसान हुआ था।
अभी तक नहीं मिला बाढ़ का मुआवजा
2023 की बाढ़ में गांव के चारों तरफ पानी ही पानी था। उनके मकान डूब गए थे पूरा परिवार घर की छत पर रहने लगा था बाढ़ से उसकी दो एकड़ फसल खराब हो गई लेकिन मुआवजे के नाम पर नाममात्र ही पैसा दिया गया। बाद में और पैसा आने की बात कही गई। 2 साल से मुआवजे की इंतजार है।
-जरनैल सिंह, गांव घासवा।
2023 की बाढ़ में उसकी 5 लाख की फसल खराब हो गई थी। गांव में पानी आने के चलते वह अपना घर छोड़कर सिरसा रिश्तेदारी में चले गए थे। 2 साल बीत जाने के बाद भी आज भी वह मंजर याद आता है तथा मानसून आने पर उन्हें बाढ़ आने की चिंता सताने लगती है।
-हरभजन सिंह, गांव लांबा।
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2023 की बाढ़ में उसकी 15 एकड़ फसल खराब हो गई, जिसका मुआवजा अभी तक नहीं मिला। बाढ़ से उनके लाखों का नुकसान हो गया जिससे वे अभी उभर नहीं पाए हैं। पिछले वर्ष मानसून सीजन में भी उन्हें फसलों की चिंता होने लगी थी। प्रशासन अच्छे से तैयारी करे।
-हरदेव सिंह, गांव कलंदरगढ़।
2 साल पूर्व आई बाढ़ से उनकी 5 एकड़ धान की फसल तबाह हो गई व उनके मकानों में दरारें आ गई व उनके परिवार में अन्य पड़ोसियों ने गांव के गुरुद्वारे में शरण ली। गांव के सरपंच ने गांव के नुकसान की लिस्ट बनाकर भी दी लेकिन उन्हें आज तक कोई भी मुआवजा नहीं दिया गया।
-नरेंद्र सिंह, घासवा किसान।