जननी सुरक्षा का दावा करने वाला स्वास्थ्य विभाग जिले में गर्भवती को अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं दे पा रहा है। जिले के किसी भी स्वास्थ्य केंद्र पर गर्भवती को अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं मिलती है। यहां तक कि जिला अस्पताल में भी पिछले पांच माह से सेंटर बंद पड़ा है। जबकि यहां पर प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप के तहत अल्ट्रासाउंड सेंटर शुरू किया गया था, लेकिन विशेषज्ञ के बाहर जाने के कारण सेंटर बंद है। 10 जून को सेंटर खोलने का दावा किया गया था, एक माह से ज्यादा समय होने के बाद भी सुविधा दोबारा से शुरू नहीं हो पाई है। जबकि यहां पर रोजाना 130 से 140 गर्भवती की ओपीडी होती है।
जिले भर में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपचार करवाने वाली गर्भवती को मजबूरी में निजी सेंटरों पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने फतेहाबाद, जाखल, भट्टू , रतिया और टोहाना में सेंटर पैनल में ले रखे है लेकिन समय पर उन्हें सुविधा नहीं मिल पा रही है। यहां पर अल्ट्रासाउंड के लिए पांच से छह घंटों का इंतजार करना पड़ रहा है। संवाद
जिला नागरिक अस्पताल : 1
नागरिक अस्पताल : 2
सीएचसी : 5
पीएचसी : 21
अल्ट्रासाउंड विशेषज्ञ : 0
हर साल डिलिवरी : करीब 18000
जिले भर में एक भी विशेषज्ञ नहीं, पैनल के सहारे
जिले भर में नागरिक अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर गर्भवती का पंजीकरण होता है। इसके अलावा नागरिक अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर गर्भवती की डिलिवरी की सुविधा है। लेकिन जानकर हैरानी होगी कि कहीं भी अल्ट्रासाउंड विशेषज्ञ नहीं है। फतेहाबाद, भट्टू, टोहाना, जाखल और रतिया में स्वास्थ्य विभाग ने अल्ट्रासाउंड सेंटर पैनल में ले रखे है। इन्हें जननी सुरक्षा योजना के तहत स्वास्थ्य विभाग अल्ट्रासाउंड का भुगतान करता है।
यहां इमरजेंसी में नहीं होते अल्ट्रासाउंड
नागरिक अस्पताल में रात के समय डिलिवरी केस में दिक्कत होने पर डॉक्टर अल्ट्रासाउंड के लिए परामर्श करते है। लेकिन अल्ट्रासाउंड की सुविधा रात के समय पैनल सेंटर में नहीं मिलती है। इसके चलते परिवार के लोगों को अपने स्तर पर अल्ट्रासाउंड के लिए निजी सेंटरों में ले जाना पड़ रहा है। यहां पर 800 से 1200 रुपये तक चुकाने पड़ते है। जबकि जच्चा को तमाम सुविधाएं उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है। जननी सुरक्षा योजना के तहत बजट भी जारी होता है।
कोट
अल्ट्रासाउंड सेंटर को जल्द शुरू कर दिया जाएगा। इसको लेकर कागजी कार्यवाही शुरू की जा रही है। पीपीपी के तहत ही सेंटर को चलाया जाएगा। सिविल सर्जन के साथ इसको लेकर चर्चा हो चुकी है। पहले डॉ. अर्जुन चौधरी बाहर चले गए थे, इसी कारण से सेंटर बंद करना पड़ा था।
- डॉ. सुनीता सोखी, उप सिविल सर्जन।