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Fatehabad News: कोविड के बाद होम्योपैथिक में बढ़ा विश्वास, जन्मजात बीमारी के ग्रस्तों का उपचार

Thu, 09 Apr 2026 11:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
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भट्टूकलां में चिकित्सक मरीज की जांच करते हुए स्त्रोत आयुष विभाग
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फतेहाबाद। बिना साइड इफेक्ट्स बीमारी को जड़ से खत्म करने के कारण मरीजों का होम्योपैथिक उपचार की तरफ से विश्वास बढ़ रहा है। पहले जहां अस्पतालों में 15 से 20 मरीजों की ओपीडी होती थी वहां अब 60 से 70 मरीज रोजाना उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। कोविडकाल में स्वास्थ्य विभाग द्वारा लोगों को घर-घर जाकर इम्युनिटी बूस्ट के लिए दवाइयां दी गई। उनके बेहतर परिणाम के बाद मरीजों का भी विश्वास बढ़ा है।
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अब स्थिति यह बन गई है कि अस्पतालों में चर्म रोग से लेकर जन्मजात बीमारी से ग्रस्त बच्चों का उपचार होम्योपैथिक पद्धति से हो रहा है। जिले में होम्योपैथिक डॉक्टरों के पांच पद है। इसमें एक पद जिला मुख्यालय पर खाली है। चिकित्सक की माने तो चर्म रोग, पथरी, नजला, बवासीर, फैटी लीवर, शुगर, मधुमेह की बीमारी से ग्रस्त मरीज सबसे ज्यादा आ रहे हैं।

रतिया अस्पताल में होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. जसविंद्र का कहना है कि एलोपैथिक दवा लेकर जो मरीज ठीक नहीं हो रहे हैं और वे होम्योपैथिक उपचार से ठीक हो रहे हैं। गंभीर और पुरानी बीमारियां होम्योपैथिक दवा से जड़ से खत्म हुई हैं। जिन मरीजों को ऑपरेशन करवाने तक की नौबत आई वे तक होम्योपैथिक दवा लेकर ठीक हुए हैं। लोगों में भ्रम रहता है कि उपचार लंबा चलता है लेकिन ऐसा नहीं है। बीमारी पर निर्भर करता है और परिणाम भी जल्द मिलते हैं।
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बीपी-शुगर हो रहा कंट्रोल, पाइल्स बीमारी हो रही ठीक

भट्टूकलां के आयुष विंग में तैनात होम्योपैथिक मेडिकल ऑफिसर डॉ. मीना बताती है कि उनके पास रोजाना 35 से 40 मरीजों की ओपीडी रहती है। पहले से होम्योपैथिक के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ा है। पथरी, गदूद, बच्चेदानी में रसौली केस में ऑपरेशन तक की नौबत आ जाती है। लेकिन होम्योपैथिक दवा लेकर मरीजों की बीमारी जड़ से खत्म हुई है। इसके अलावा बीपी-शुगर बीमारी में लोगों को पूरी उम्र एलोपैथिक दवा खाने की सलाह दी जाती है लेकिन होम्योपैथिक में नियमित दवा लेने की जरूरत नहीं पड़ती है। यहां तक थायराइड बीमारी भी जड़ से खत्म हो जाती है। बवासीर तक की बीमारी में उपचार कारगर है, एसिडिटी बनना आदि में भी उपचार संभव है। ओपीडी में मरीज स्किन एलर्जी, जोड़ों में दर्द, खानपान में दिक्कत, बच्चों में पेट के कीड़े, इम्युनिटी समेत कई बीमारियों का उपचार लेने के लिए आ रहे हैं।

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होम्योपैथिक उपचार के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ा है। लोग जागरूक भी हो रहे हैं। लाइफ स्टाइल से संबंधित बीमारियों में होम्योपैथिक उपचार के बेहतर परिणाम मिल रहे हैं। दवा को बच्चे से लेकर बुजुर्ग आसानी से ले सकते हैं। इसके इतने साइड इफेक्ट भी नहीं होते।
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-डॉ. प्रवीण शर्मा, जिला आयुर्वेदिक अधिकारी
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